कोर्ट के आदेश के पालन में लिए गए फ़ैसले की वैधता की जांच अवमानना की कार्यवाही में नहीं हो सकती: दिल्ली हाईकोर्ट
Shahadat
20 Jun 2026 10:09 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने फिर से कहा है कि कोर्ट के निर्देश के पालन में लिए गए किसी प्रशासनिक फ़ैसले की वैधता या सही होने की जांच अवमानना की कार्यवाही में नहीं की जा सकती।
जस्टिस तेजस करिया ने कॉलेज की अवमानना याचिका का निपटारा करते हुए यह बात कही। कॉलेज ने आरोप लगाया कि नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (NCTE) ने उसके B.Ed. कॉलेज परिसर को दूसरी जगह ले जाने के लंबे समय से लंबित आवेदन पर फ़ैसला करने के पहले के निर्देशों का जानबूझकर पालन नहीं किया।
याचिकाकर्ता ने बताया कि उसे 2005 में NCTE से हर साल 100 छात्रों के साथ B.Ed. कोर्स चलाने की मान्यता मिली थी। बाद में उसने 2007 और 2013 में आवेदन देकर अपना परिसर दूसरी जगह ले जाने की अनुमति मांगी।
कई सालों तक अनुरोध पर कोई फ़ैसला न होने का आरोप लगाते हुए कॉलेज हाईकोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने 29 जनवरी, 2026 को NCTE को छह हफ़्ते के अंदर आवेदन पर फ़ैसला करने का निर्देश दिया।
जब निर्देश का पालन नहीं हुआ तो कॉलेज ने अवमानना की कार्यवाही शुरू की। उसने तर्क दिया कि कोर्ट के बार-बार निर्देश देने के बावजूद आवेदन सालों तक लंबित रहा।
याचिकाकर्ता ने आगे तर्क दिया कि NCTE ने 2 जून, 2026 को परिसर बदलने का अनुरोध खारिज करते हुए जो फ़ैसला लिया, वह भी तय प्रक्रिया के खिलाफ़ था, क्योंकि आदेश जारी करने से पहले प्रस्तावित परिसर का कोई निरीक्षण नहीं किया गया।
दूसरी ओर, NCTE ने कहा कि आवेदन पर 2 जून, 2026 को ही फ़ैसला ले लिया गया और कॉलेज को इसकी जानकारी दी गई। उसने तर्क दिया कि कारण बताओ नोटिस जारी करने और कॉलेज के जवाब व दस्तावेजों पर विचार करने के बाद कोर्ट के निर्देशों की कोई जानबूझकर अवहेलना नहीं की गई।
हाईकोर्ट ने कहा कि एक बार जब अथॉरिटी ने आवेदन पर फ़ैसला ले लिया, तो अवमानना के अधिकार क्षेत्र का दायरा खत्म हो गया।
कोर्ट ने कहा,
"चूंकि प्रतिवादियों ने अब 02.06.2026 को आवेदन पर फ़ैसला ले लिया है, इसलिए मौजूदा अवमानना कार्यवाही में उस फ़ैसले की वैधता की जांच नहीं की जा सकती।"
इसलिए कोर्ट ने इस मामले में कोई भी आदेश पारित करने से इनकार किया।
Case title: R.S.C. College v. Ms. Sukhgeet Kaur, Member Secretary And Anr

