सह-आरोपी आयकर अधिनियम के तहत कंपनी या HUF द्वारा किए गए अपराधों के लिए अलग से आवेदन कर सकते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

  • सह-आरोपी आयकर अधिनियम के तहत कंपनी या HUF द्वारा किए गए अपराधों के लिए अलग से आवेदन कर सकते हैं: दिल्ली हाईकोर्ट

    दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि सह-आरोपी आयकर अधिनियम, 1961 के तहत किसी कंपनी या हिंदू अविभाजित परिवार द्वारा किए गए अपराधों के लिए अलग से आवेदन करने के हकदार हैं।

    कार्यवाहक चीफ़ जस्टिस विभु बाखरू और जस्टिस तुषार राव गेदेला की खंडपीठ ने फैसला सुनाया कि सह-आरोपी को कंपनी या एचयूएफ द्वारा कंपाउंडिंग के लिए आवेदन दाखिल करने का इंतजार करने की आवश्यकता नहीं है।

    ऐसा करते हुए सरकार ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड द्वारा जारी दिशानिर्देशों पर भरोसा किया, जिसमें कहा गया है कि जहां किसी कंपनी या एचयूएफ द्वारा अपराध किया जाता है, जैसा कि अधिनियम की धारा 278b या 278c में परिभाषित किया गया है, कंपाउंडिंग के लिए आवेदन मुख्य आरोपी और अपराध का दोषी समझे जाने वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा अलग से या संयुक्त रूप से दायर किया जा सकता है।

    इस मामले में, याचिकाकर्ता एक कंपनी का निदेशक था और प्रासंगिक अवधि के लिए टीडीएस जमा करने में चूक के लिए आयकर अधिनियम की धारा 276 b और 278 b के तहत पकड़ा गया था। अपराधों के कंपाउंडिंग के लिए उनके आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि कंपनी ने ऐसा कोई आवेदन दायर नहीं किया था।

    मजिस्ट्रेट कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता के कंपाउंडिंग के आवेदन पर स्टैंड अलोन आधार पर विचार नहीं किया जा सकता है।

    यह ध्यान देने योग्य है कि दिवाला और दिवालियापन संहिता, 2016 के तहत स्थगन के अनुसार कंपनी के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी गई थी।

    हाईकोर्ट ने कहा कि सीबीडीटी के दिनांक 17.10.2024 के दिशानिर्देशों के पैराग्राफ 11 में स्पष्ट था कि "सह-आरोपी अब अपराधों के कंपाउंडिंग के लिए अलग से आवेदन करने के हकदार हैं।"

    दिशानिर्देश में कहा गया है- किसी कंपनी या एचयूएफ द्वारा अपराधों के मामलों में, मुख्य आरोपी या सह-आरोपी अलग या संयुक्त रूप से आवेदन कर सकते हैं। इन दिशा-निर्देशों के अंतर्गत यथा निर्धारित अपराध के लिए उनमें से किसी एक द्वारा पृथक रूप से अथवा संयुक्त रूप से शमन प्रभारों का भुगतान किए जाने पर, सक्षम प्राधिकारी अधिनियम की धारा 279(2) के अंतर्गत आदेश के तहत मुख्य अभियुक्त के साथ-साथ सभी सह-अभियुक्तों के अपराधों को कंपाउंड करेगा।

    उपरोक्त के प्रकाश में, न्यायालय ने आक्षेपित आदेश को रद्द कर दिया और नए सिरे से निर्णय लेने के लिए सक्षम प्राधिकारी को कंपाउंडिंग आवेदन भेज दिया।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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