एशियन गेम्स में खिलाड़ी को किसी वर्ग से बाहर रखने के फैसले में कोर्ट दखल नहीं दे सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
Amir Ahmad
22 Sept 2026 3:34 PM IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी खिलाड़ी को किसी विशेष वर्ग में प्रतियोगिता से बाहर रखने का फैसला यदि संबंधित प्राधिकरण और विशेषज्ञों ने वस्तुनिष्ठ आधार पर लिया है, तो अदालत उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी 20वें एशियन गेम्स में महिला प्लस 87 किलोग्राम वर्ग के लिए चयन ट्रायल नहीं कराने के फैसले को चुनौती देने वाली खिलाड़ी मुस्कान राठी की याचिका खारिज करते हुए की।
जस्टिस अमित महाजन ने कहा कि किसी खिलाड़ी को किसी विशेष वर्ग में भाग लेने से बाहर रखने का फैसला संबंधित प्राधिकरण और विषय विशेषज्ञों द्वारा वस्तुनिष्ठ रूप से लिया गया है और इसमें अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
मुस्कान राठी ने इंडियन कुराश एसोसिएशन (टीआईकेए) के उस फैसले को चुनौती दी, जिसके तहत महिला माइनस 57 किलोग्राम और माइनस 78 किलोग्राम वर्ग में चयन ट्रायल कराने का निर्णय लिया गया, जबकि आधिकारिक महिला प्लस 87 किलोग्राम वर्ग में चयन ट्रायल नहीं कराने का फैसला किया गया।
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से प्लस 87 किलोग्राम वर्ग में निष्पक्ष और पारदर्शी चयन ट्रायल कराने का निर्देश देने की मांग की। उनका कहना था कि इस वर्ग के सभी पात्र खिलाड़ियों पर तुलनात्मक योग्यता, वस्तुनिष्ठ प्रदर्शन मानकों और पदक जीतने की क्षमता के आधार पर विचार किया जाना चाहिए।
अधिकारियों ने हाईकोर्ट में दाखिल जवाब में कहा कि भारत ने पहले माइनस 57 किलोग्राम और माइनस 78 किलोग्राम वर्गों में पदक हासिल किए, जबकि पिछले दो वर्षों में प्लस 87 किलोग्राम वर्ग में कोई अंतरराष्ट्रीय पदक नहीं मिला।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित अधिकारियों ने अलग-अलग वर्गों में पदक जीतने की तुलनात्मक संभावना और पदक हासिल करने की संभावनाओं का आकलन किया। कोर्ट ने कहा कि सरकार की नीति का उद्देश्य पदक जीतना है और इसी आकलन के आधार पर प्लस 87 किलोग्राम वर्ग में किसी खिलाड़ी को नहीं भेजने का फैसला लिया गया।
हाईकोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए अदालत अधिकारियों को अलग दृष्टिकोण अपनाने का निर्देश देने के लिए परमादेश जारी नहीं कर सकती।
कोर्ट ने राठी की उस दलील को भी स्वीकार नहीं किया कि माइनस 57 किलोग्राम वर्ग में चयनित खिलाड़ियों ने हिस्सा नहीं लिया, जबकि उनके नाम भेजे गए।
हाईकोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि 20वें एशियन गेम्स की शुरुआत 19 सितंबर 2026 को हो चुकी थी। ऐसे में इस चरण पर याचिकाकर्ता को मांगी गई राहत देना संभव नहीं था।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने मुस्कान राठी की याचिका खारिज की।

