एम्बेसडर होटल ने 'पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट' के तहत केंद्र के बेदखली नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया

Shahadat

18 Jun 2026 8:10 PM IST

  • एम्बेसडर होटल ने पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट के तहत केंद्र के बेदखली नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया

    एम्बेसडर होटल के मालिक ने 'पब्लिक प्रीमिसेस एक्ट' के तहत जारी बेदखली नोटिस के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की। यह नोटिस दशकों पुराने मामले में अपीलीय अदालत के उस फैसले के तुरंत बाद जारी किया गया, जिसमें केंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया गया। अदालत ने माना कि मालिक ने संबंधित प्रॉपर्टी पर पब्लिक होटल बनाकर और चलाकर सरकारी ग्रांट (अनुदान) की शर्तों का उल्लंघन किया।

    होटल के मालिक 'सर शोभा सिंह एंड संस प्राइवेट लिमिटेड' ने हाई कोर्ट में अपील दायर कर तीस हजारी कोर्ट (सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट) के डिस्ट्रिक्ट जज के 9 जून के फैसले को चुनौती दी। इस फैसले में सीनियर सिविल जज-कम-रेंट कंट्रोलर (सेंट्रल) के 2009 के आदेश के खिलाफ केंद्र की याचिका स्वीकार की गई।

    2009 के फैसले में होटल के निर्माण को कानूनी माना गया।

    स्टे (रोक) की मांग करते हुए अपीलकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि 'पब्लिक प्रीमिसेस (अनऑथराइज्ड ऑक्यूपेंट्स की बेदखली) एक्ट' के प्रावधानों के तहत प्रतिवादी द्वारा 11 जून को जारी नोटिस के कारण बेदखली का तत्काल खतरा है।

    हालांकि, केंद्र के वकील ने तर्क दिया कि PP Act के तहत 11.06.2026 को जारी नोटिस स्वतंत्र है और इसका ट्रायल कोर्ट के फैसले से कोई संबंध नहीं है।

    जस्टिस तेजस करिया ने अंतरिम राहत के लिए आवेदन पर नोटिस जारी किया और कहा:

    "सीजीएससी (CGSC) ने निर्देश मिलने पर बयान दिया कि PP Act के तहत कार्यवाही विवादित फैसले का हवाला दिए बिना या उससे प्रभावित हुए बिना की जाएगी और इस संबंध में सभी पक्षों के अधिकार और तर्क सुरक्षित रखे गए। CGSC द्वारा दिए गए बयान को रिकॉर्ड पर लिया गया और प्रतिवादी को उक्त बयान का पालन करने का निर्देश दिया जाता है।"

    केंद्र के वकील के बयान को देखते हुए अदालत ने कहा कि अंतरिम आवेदन के लंबित रहने के दौरान अपीलीय अदालत के फैसले पर रोक लगाने वाला कोई अंतरिम आदेश पारित करने की आवश्यकता नहीं है।

    अपीलीय अदालत ने माना कि गवर्नर जनरल इन काउंसिल और सरदार बहादुर सर शोभा सिंह एंड संस लिमिटेड के बीच 08.10.1945 को हुआ लीज एग्रीमेंट, 'गवर्नमेंट ग्रांट एक्ट' के प्रावधानों के तहत सरकारी ग्रांट की प्रकृति का था।

    अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता ने पब्लिक होटल बनाकर और चलाकर एग्रीमेंट की शर्तों और नियमों का जानबूझकर उल्लंघन किया। इसके अलावा, 24.02.1959 के लिखित नोटिस जारी होने और मिलने के बाद भी अपील करने वाला तय समय के अंदर नियमों के उल्लंघन को ठीक करने में नाकाम रहा।

    इसलिए अपील कोर्ट ने माना कि भारत सरकार ने लीज़ के लिए ग्रांट/एग्रीमेंट की क्लॉज़ XVIII में साफ़ तौर पर लिखी शर्त के अनुसार, विवादित प्रॉपर्टी पर दोबारा कब्ज़ा करने और उसे अपने पास रखने के अपने अधिकार का सही और कानूनी तरीके से इस्तेमाल किया।

    संदर्भ के लिए, सरकार द्वारा प्रॉपर्टी पर दोबारा कब्ज़ा करने के बाद कंपनी ने 1960 में ट्रायल कोर्ट में केस दायर किया, जिसका फ़ैसला आखिरकार कंपनी के पक्ष में आया। इसके ख़िलाफ़ सरकार अपील कोर्ट गई और तर्क दिया कि लीज़ एग्रीमेंट में साफ़ तौर पर कहा गया कि कंपनी बिल्डिंग में सिर्फ़ रिहायशी यूनिट बनाएगी। सरकार का कहना था कि एग्रीमेंट का उल्लंघन करते हुए कंपनी ने होटल बना लिया।

    हाईकोर्ट ने अब अपील स्वीकार की और मामले की सुनवाई के लिए 23 जुलाई की तारीख तय की।

    Case title: SIR SOBHA SINGH AND SONS PVT. LTD v/s UNION OF INDIA

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