AgustaWestland Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने CBI मामले में क्रिश्चियन मिशेल को जमानत देने से किया इनकार

Praveen Mishra

25 Sept 2024 6:11 PM IST

  • AgustaWestland Case: दिल्ली हाईकोर्ट ने CBI मामले में क्रिश्चियन मिशेल को जमानत देने से किया इनकार

    दिल्ली हाईकोर्ट ने अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज मामले में ब्रिटिश हथियार सलाहकार क्रिश्चियन जेम्स मिशेल की जमानत याचिका बुधवार को खारिज कर दी।

    जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने सीबीआई के मामले में मिशेल की जमानत याचिका खारिज कर दी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दर्ज धनशोधन मामले में उसकी जमानत याचिका को 18 नवंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

    मिशेल को 2022 में एक समन्वय पीठ द्वारा कथित घोटाले के संबंध में सीबीआई और ईडी मामलों में जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

    बाद में, पिछले साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज करने के खिलाफ उनकी एसएलपी खारिज कर दी थी और उन्हें नियमित जमानत के लिए निचली अदालत जाने की छूट दी थी। निचली अदालत ने उनकी नियमित जमानत याचिकाएं भी खारिज कर दी थीं।

    इस साल की शुरुआत में निचली अदालत ने मामले में हिरासत से रिहाई की मांग करने वाली मिशेल की याचिका खारिज कर दी थी।

    मार्च में, सुप्रीम कोर्ट ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत दायर उनकी याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, यह देखते हुए कि उनके द्वारा उठाए गए विशेष याचिका के सिद्धांत को सीआरपीसी की धारा 436 ए के तहत उनकी जमानत याचिका को अस्वीकार करने वाले अदालत के पिछले आदेश में पर्याप्त रूप से निपटा गया था।

    मिशेल को दुबई से प्रत्यर्पित किए जाने के बाद दिसंबर 2018 में गिरफ्तार किया गया था। वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले में कथित अवैध लेनदेन के लिए उन्हें 'बिचौलिया' कहा जाता है।

    CBI ने आरोप लगाया था कि वीवीआईपी हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति के लिए आठ फरवरी 2010 को हस्ताक्षरित सौदे से सरकारी खजाने को 39.82 करोड़ यूरो (करीब 2666 करोड़ रुपये) का अनुमानित नुकसान हुआ।

    ED ने जून, 2016 में मिशेल के खिलाफ आरोपपत्र दायर किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि उसे अगस्ता वेस्टलैंड से तीन करोड़ यूरो (करीब 225 करोड़ रुपये) मिले थे।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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