2020 दिल्ली दंगे: हेड कांस्टेबल रतन लाल हत्या मामले में आरोपमुक्ति याचिका पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

Praveen Mishra

18 July 2025 6:23 PM IST

  • 2020 दिल्ली दंगे: हेड कांस्टेबल रतन लाल हत्या मामले में आरोपमुक्ति याचिका पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

    दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित हेड कांस्टेबल रतन लाल हत्या मामले में आरोपमुक्त करने की मांग करने वाली एक आरोपी की याचिका पर नोटिस जारी किया है।

    जस्टिस शालिंदर कौर ने मोहम्मद अली खान की याचिका पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। खालिद।

    अभियोजन पक्ष ने याचिका की विचारणीयता पर दलीलों को संबोधित करने का अपना अधिकार भी सुरक्षित रखा है।

    अदालत ने मामले की सुनवाई 14 अक्टूबर को सूचीबद्ध करते हुए कहा, ''सुनवाई की अगली तारीख से पहले जवाब दाखिल किया जाए और इसकी अग्रिम प्रति विपरीत पक्ष को भेजी जाए।

    अधिवक्ता आरएचए सिकंदर, मो. हसन और हीमा आरोपी की ओर से पेश हुए। एसपीपी आशीष दत्ता के साथ एडवोकेट मयंक दिल्ली पुलिस की ओर से पेश हुए।

    खालिद ने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें पिछले साल नवंबर में उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 148, 186, 188, 302, 323, 325, 332, 333, 353, 427 और 435 तथा सार्वजनिक संपत्ति क्षति रोकथाम अधिनियम की धारा चार के तहत आरोप तय किए गए थे।

    खालिद को जून 2023 में मामले में गिरफ्तार किया गया था, जब उन्हें दिल्ली पुलिस द्वारा दायर 5वीं पूरक चार्जशीट में आरोपी के रूप में नामित किया गया था। उन्हें उसी साल सितंबर में मामले में जमानत मिल गई थी।

    खालिद ने अपनी याचिका में दलील दी है कि उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है और न ही उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत है।

    उन्होंने दलील दी कि आरोपपत्र में ऐसी कोई सामग्री नहीं है जो उनके बारे में गंभीर संदेह पैदा करती हो या उनके और कथित अपराध के बीच सीधा संबंध स्थापित करती हो।

    याचिका में कहा गया है, 'भले ही दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 161 के तहत दर्ज किए गए सभी आरोपों के साथ-साथ गवाहों के बयान भी सही माने जाते हैं, लेकिन उस मामले में भी याचिकाकर्ता कथित अपराधों के लिए उत्तरदायी नहीं होगा'

    दयालपुर पुलिस स्टेशन में भारतीय दंड संहिता की धारा 186, 353, 332, 333, 323, 109, 144, 147, 148, 149, 153ए, 188, 336, 427, 307,308, 397, 412, 302, 201, 120बी और 34 के तहत सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम की धारा 3 और 4 और धारा 25, 27, शस्त्र अधिनियम की धारा 54 और 59।

    यह कहा गया कि दोपहर 1 बजे के आसपास, प्रदर्शनकारी डंडा, लाठी, बेसबॉल बैट, लोहे की छड़ और पत्थर लेकर मुख्य वजीराबाद रोड पर इकट्ठा होने लगे और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों पर ध्यान नहीं दिया, जिससे वे हिंसक हो गए।

    आगे कहा गया कि प्रदर्शनकारियों को बार-बार चेतावनी देने के बाद, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हल्के बल और गैस के गोले का इस्तेमाल किया गया। कॉन्स्टेबल के मुताबिक, हिंसक प्रदर्शनकारियों ने लोगों के साथ-साथ पुलिस कर्मियों को भी पीटना शुरू कर दिया, जिसकी वजह से वह खुद अपनी दाहिनी कोहनी और हाथ पर चोट लगने से घायल हो गए।

    उन्होंने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों ने डीसीपी शाहदरा, एसीपी गोकुलपुरी और हेड कांस्टेबल रतन लाल पर हमला किया, जिसके कारण वे सड़क पर गिर गए और गंभीर रूप से घायल हो गए।

    सभी घायलों को अस्पताल ले जाया गया, जहां पता चला कि रतनलाल की मौत हो चुकी है और डीसीपी शाहदरा बेहोश हैं और उनके सिर में चोटें आई हैं।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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