बिना सूचना फ्लाइट प्रीपोन करना सेवा में कमी, यात्रियों को ₹50,000 मुआवजा देगी एयरलाइन: राज्य उपभोक्ता आयोग, चंडीगढ़
Praveen Mishra
11 May 2026 12:55 PM IST

राज्य उपभोक्ता आयोग, चंडीगढ़ ने Tata SIA Airlines Ltd को यात्रियों को फ्लाइट समय में बदलाव की पूर्व सूचना न देने के मामले में सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराया है। आयोग ने कहा कि फ्लाइट शेड्यूल में बदलाव की समय पर जानकारी देना एयरलाइंस की मूल जिम्मेदारी है।
आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष राज शेखर अत्री और सदस्य प्रीतिंदर सिंह शामिल थे, ने जिला आयोग द्वारा दिए गए मुआवजे को बढ़ाते हुए यात्रियों को मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए ₹50,000 देने का आदेश दिया। साथ ही ₹15,000 मुकदमेबाजी खर्च और ₹58,641 की राशि 9% वार्षिक ब्याज सहित लौटाने के निर्देश भी दिए गए।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने चंडीगढ़ से दिल्ली और वापसी के घरेलू टिकटों के साथ दिल्ली से बाली (डेनपासार) और वापसी के अंतरराष्ट्रीय टिकट Tata SIA Airlines Ltd के माध्यम से बुक किए थे।
2 अप्रैल 2024 को जब वे वापसी यात्रा के लिए डेनपासार एयरपोर्ट पहुंचे, तब उन्हें पता चला कि उनकी फ्लाइट बिना किसी पूर्व सूचना के पहले कर दी गई थी। इसके कारण वे फ्लाइट नहीं पकड़ सके और विदेशी एयरपोर्ट पर फंस गए।
इसके बाद शिकायतकर्ताओं को करीब ₹51,000 खर्च कर नई टिकटें खरीदनी पड़ीं। भारत पहुंचने में देरी होने से उनकी दिल्ली से चंडीगढ़ की कनेक्टिंग फ्लाइट भी छूट गई, जिससे उन्हें अतिरिक्त यात्रा खर्च उठाना पड़ा।
शिकायतकर्ताओं ने कानूनी लीगल नोटिस भेजा, लेकिन राहत नहीं मिलने पर जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया। जिला आयोग ने आंशिक राहत देते हुए ₹58,641 की वापसी, ब्याज और ₹7,000 मुआवजा देने का आदेश दिया था।
हालांकि, शिकायतकर्ताओं ने मुआवजे की राशि को अपर्याप्त बताते हुए राज्य आयोग में अपील दायर की।
राज्य आयोग ने कहा कि यह निर्विवाद है कि एयरलाइन ने फ्लाइट प्रीपोन करने की सूचना यात्रियों को नहीं दी। आयोग ने माना कि यात्रियों को तय समय पर एयरपोर्ट पहुंचने के बावजूद यह पता चला कि उनकी फ्लाइट पहले ही रवाना हो चुकी थी, जिससे टिकट व्यर्थ हो गए।
आयोग ने कहा कि विदेशी एयरपोर्ट पर फंसने से शिकायतकर्ताओं को भारी मानसिक तनाव, असुविधा और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्हें तत्काल वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था करनी पड़ी और एयरलाइन की ओर से कोई सहायता नहीं दी गई।
आयोग ने यह भी कहा कि जिला आयोग द्वारा दिया गया ₹7,000 का मुआवजा शिकायतकर्ताओं की पीड़ा और कठिनाइयों की तुलना में बेहद कम था। इसलिए मुआवजे को बढ़ाकर ₹50,000 किया गया।
आयोग ने निर्देश दिया कि सभी भुगतान 45 दिनों के भीतर किए जाएं। आदेश का पालन न करने पर संबंधित राशि पर डिफॉल्ट की तारीख से वसूली तक 12% वार्षिक ब्याज देना होगा।

