दिल्ली जिला आयोग ने शिकायतकर्ता के सामान को नुकसान पहुंचाने के लिए Tata SIA Airlines को जिम्मेदार ठहराया

  • दिल्ली जिला आयोग ने शिकायतकर्ता के सामान को नुकसान पहुंचाने के लिए Tata SIA Airlines को जिम्मेदार ठहराया

    दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने शिकायतकर्ता के सामान को नुकसान पहुंचाने के लिए Tata SIA Airlines को जिम्मेदार ठहराया। शिकायतकर्ता को हुए नुकसान और तनाव के लिए 10,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।

    मामले की पृष्ठभूमि:

    शिकायतकर्ता ने 25.02.2023 को दिल्ली से मुंबई के लिए फ्लाइट बुक की थी और उसमें सिंगल केबिन बैग था। फ्लाइट फुल थी और ओवरहेड केबिन बैग रखने के लिए जगह नहीं बची थी। इसलिए, कर्मचारियों ने शिकायतकर्ता से चेक-इन बैग में अपना बैग देने का अनुरोध किया। इस पर, उन्होंने कर्मचारियों से अनुरोध किया कि वे बैग को उचित देखभाल और जिम्मेदारी के साथ संभालें क्योंकि इसमें नाजुक सामान था। हालांकि लैंडिंग के बाद, जब शिकायतकर्ता अपना बैग लेने के लिए कन्वेयर बेल्ट के पास गया, तो वह यह देखकर चौंक गया कि उसका बैग बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त और टूटा हुआ था। शिकायतकर्ता द्वारा इस मुद्दे को कंपनी के अधिकृत व्यक्ति के साथ तुरंत उठाया गया था लेकिन कंपनी इस मुद्दे का निवारण करने में विफल रही। इसलिए शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाकर उचित मुआवजे की मांग की।

    एयरलाइन कंपनी की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। इसलिए, आयोग ने शिकायतकर्ता की दलीलें सुनने के बाद ही कार्यवाही शुरू की।

    आयोग का निर्णय:

    आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा दायर टूटे बैग की तस्वीरों को देखा और पाया कि बैग का एक पहिया क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके अलावा, न तो कोई मुआवजा प्रदान किया गया था और न ही कंपनी द्वारा उक्त क्षति के लिए कोई कार्रवाई की गई थी। इस प्रकार, कंपनी को शिकायतकर्ता को त्रुटिपूर्ण सेवाएं प्रदान करने के लिए उत्तरदायी ठहराया गया और मुआवजे के रूप में 10,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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