एक्सपायर्ड नूडल्स बेचने पर रिलायंस रिटेल दोषी, कांगड़ा उपभोक्ता आयोग ने ₹20,000 मुआवजा देने का दिया आदेश

Praveen Mishra

15 July 2026 12:12 PM IST

  • एक्सपायर्ड नूडल्स बेचने पर रिलायंस रिटेल दोषी, कांगड़ा उपभोक्ता आयोग ने ₹20,000 मुआवजा देने का दिया आदेश

    जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, कांगड़ा (धर्मशाला) ने रिलायंस रिटेल लिमिटेड को एक्सपायर्ड इंस्टेंट नूडल्स बेचने के मामले में सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) का दोषी ठहराया है। आयोग ने कहा कि किसी भी रिटेलर का यह वैधानिक और अपरिहार्य दायित्व है कि वह ग्राहकों को एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद न बेचे, क्योंकि ऐसा करना उपभोक्ताओं के सुरक्षा के अधिकार का उल्लंघन है।

    मामले में शिकायतकर्ता जुगल किशोर ने 26 फरवरी 2026 को रिलायंस स्मार्ट पॉइंट से स्पाइसी कोरियन इंस्टेंट नूडल्स का एक पैकेट खरीदा था। घर पहुंचने पर उनकी नाबालिग बेटी ने नूडल्स का थोड़ा हिस्सा खाया, जिसके कुछ ही देर बाद उसे उल्टी होने लगी और उसकी तबीयत बिगड़ गई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने पैकेट की जांच की तो पता चला कि नूडल्स की एक्सपायरी 28 नवंबर 2025 थी, जबकि उसे लगभग तीन महीने बाद बेचा गया था।

    शिकायतकर्ता ने आयोग का दरवाजा खटखटाते हुए कहा कि एक्सपायर्ड खाद्य उत्पाद बेचना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है तथा इससे उपभोक्ता के सुरक्षा के अधिकार का भी उल्लंघन हुआ है।

    रिलायंस रिटेल ने अपने बचाव में कहा कि शिकायतकर्ता यह साबित करने के लिए कोई मेडिकल या लैब रिपोर्ट पेश नहीं कर सका कि बच्ची की तबीयत नूडल्स खाने से ही खराब हुई। कंपनी ने यह भी तर्क दिया कि उत्पाद पर एक्सपायरी डेट स्पष्ट रूप से अंकित थी और उपभोक्ता को खरीदने से पहले उसे जांचना चाहिए था। साथ ही, उसने निर्माता को भी आवश्यक पक्षकार बताया।

    आयोग ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि 'कैविएट वेंडिटर' (Let the Seller Beware) का सिद्धांत लागू होता है, जिसके तहत यह रिटेलर की जिम्मेदारी है कि वह अपनी शेल्फ पर एक्सपायर्ड उत्पाद न रखे और न ही उसकी बिक्री करे। आयोग ने कहा कि स्टोर में लगे नोटिस, जिनमें ग्राहकों को एक्सपायरी डेट जांचने की सलाह दी गई हो, रिटेलर को उसके वैधानिक दायित्व से मुक्त नहीं कर सकते। आयोग ने यह भी कहा कि एक्सपायर्ड उत्पाद बेचना अपने आप में सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है, भले ही मेडिकल साक्ष्य उपलब्ध न हो।

    इन टिप्पणियों के साथ आयोग ने शिकायत स्वीकार करते हुए रिलायंस रिटेल लिमिटेड को नूडल्स की कीमत वापस करने, शिकायतकर्ता को ₹15,000 मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए तथा ₹5,000 वाद व्यय के रूप में 30 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story