मद्रास हाईकोर्ट ने रेलवे प्लेटफॉर्म पर ट्रेन की चपेट में आने वाले व्यक्ति के परिवार को दिया मुआवजा, कहा- नहीं कह सकते कि मौत लापरवाही से हुई थी

  • मद्रास हाईकोर्ट ने रेलवे प्लेटफॉर्म पर ट्रेन की चपेट में आने वाले व्यक्ति के परिवार को दिया मुआवजा, कहा- नहीं कह सकते कि मौत लापरवाही से हुई थी

    मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में रेलवे को उस व्यक्ति के परिवार को मुआवजा देने का निर्देश दिया जो रेलवे प्लेटफॉर्म पर बैठे ट्रेन की चपेट में आ गया था और चोटों के कारण उसकी मौत हो गई थी।

    जस्टिस के राजशेखर ने कहा कि चूंकि दुर्घटना उस समय हुई जब व्यक्ति रेलवे प्लेटफॉर्म पर बैठा था इसलिए रेलवे पर यह साबित करने का भार था कि यह घटना अप्रिय घटना की परिभाषा के दायरे में नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अगर दुर्घटना उस समय हुई जब व्यक्ति पटरी पार कर रहा था तो रेलवे की दलील को स्वीकार किया जा सकता था, लेकिन यह साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं है कि व्यक्ति प्लेटफॉर्म के किनारे पर बैठा था, इसलिए इसे 'खुद से लगी चोट' नहीं कहा जा सकता।

    उन्होंने कहा, 'मृतक और उसके दोस्त के प्लेटफॉर्म पर लापरवाही से बैठने की जिम्मेदारी रेलवे पर है. बहरहाल, कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया और न ही रेलवे ने यह दिखाने के लिए अपने भार का निर्वहन किया है कि जब वे प्लेटफार्म के किनारे बैठे थे तो दुर्घटना हुई है। पहले दावेदार मृतक की पत्नी से पूछताछ के दौरान रेलवे ने यह मामला सामने नहीं लाया कि मृतक और उसका दोस्त प्लेटफॉर्म के किनारे लापरवाही से बैठे थे और उनका कृत्य 'खुद को पहुंचाई गई चोट' शब्द की परिभाषा के अंतर्गत आता है।

    रेल दावा न्यायाधिकरण ने जांच के बाद दावा याचिका खारिज करते हुए कहा था कि मृतक लापरवाही से रेलवे ट्रैक पार कर रेलवे प्लेटफॉर्म के किनारे बैठ गया था। ट्रिब्यूनल ने माना था कि मृतक के कृत्य को 'अप्रिय घटना' नहीं कहा जा सकता है। इस प्रकार परिवार ने ट्रिब्यूनल के फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

    परिवार ने दलील दी थी कि मृतक को उस समय चोटें आईं जब वह प्लेटफॉर्म पर ट्रेन में चढ़ने के लिए इंतजार कर रहे थे और उसके पास वैध यात्रा टिकट था। यह तर्क दिया गया था कि ट्रिब्यूनल ने डीआरएम रिपोर्ट में उठाए गए संदेह पर दावा याचिका को खारिज कर दिया था जो टिकाऊ नहीं था।

    रेलवे ने हालांकि दलील दी कि दुर्घटना उस वक्त हुई जब मृतक रेलवे पटरी पार कर पार करने का प्रयास कर रहे थे और चूंकि यह खुद को चोट पहुंचाने का मामला है इसलिए इसे 'अप्रिय घटना' नहीं कहा जा सकता।

    कोर्ट ने कहा कि डीआरएम रिपोर्ट में कहा गया है कि मृतक व्यक्ति प्लेटफॉर्म के किनारे पर बैठा था, जबकि लोको पायलट की रिपोर्ट से पता चलता है कि स्टेशन में प्रवेश करते समय ट्रेन ने यात्रियों को टक्कर मारी थी।

    कोर्ट ने कहा कि रेलवे ने न तो यह मामला सामने रखा कि मृतक लापरवाही से प्लेटफॉर्म के किनारे बैठा था, जबकि उसने पत्नी से पूछताछ की और न ही यह बताने के लिए कोई अन्य सबूत पेश किया कि दुर्घटना खुद से लगी चोट का परिणाम थी।

    नतीजतन, साक्ष्य के अभाव में, कोर्ट ने रेलवे को परिवार को मुआवजा देने का निर्देश दिया।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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