परियोजना को पूरा करने में चार साल की देरी, कर्नाटक RERA ने Mantri Technology Constellations को रिफंड करने का आदेश दिया

  • परियोजना को पूरा करने में चार साल की देरी, कर्नाटक RERA ने Mantri Technology Constellations को रिफंड करने का आदेश दिया

    कर्नाटक रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी की पीठ ने बिल्डर मंत्री टेक्नोलॉजी कॉन्स्टेलेशंस प्राइवेट लिमिटेड को निर्देश दिया कि वह फ्लैट खरीदने के लिए होमबॉयर द्वारा भुगतान की गई राशि वापस करे, क्योंकि बिल्डर चार साल की देरी के बावजूद परियोजना को पूरा करने में विफल रहा।

    पूरा मामला:

    एक होमबॉयर ने बैंगलोर पूर्व के रचेनाहल्ली में स्थित मंत्री मान्यता एनर्जिया नामक बिल्डर की परियोजना में एक फ्लैट बुक किया। 31.05.2017 को, होमबॉयर ने फ्लैट खरीदने के लिए एक सेल एग्रीमेंट और एक निर्माण समझौता किया। फ्लैट की कुल बिक्री प्रतिफल 85,70,050/- रुपये थी, जिसमें से होमबॉयर ने बिल्डर को अग्रिम के रूप में 10,00,000/- रुपये का भुगतान किया।

    बिल्डर को 31.12.2018 को या उससे पहले फ्लैट का कब्जा सौंपना था। हालांकि, होमबॉयर के अनुसार, परियोजना का निर्माण बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। इसलिए उन्होंने प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज कराकर ब्याज सहित रिफंड की मांग की।

    प्राधिकरण का अवलोकन और निर्देश:

    प्राधिकरण ने पाया कि, बिल्डर द्वारा होमबॉयर के साथ किए गए सेल एग्रीमेंट और निर्माण समझौते के अनुसार, बिल्डर को 31 दिसंबर, 2019 तक फ्लैट का कब्जा सौंपना था। हालांकि, बिल्डर वादा किए गए समय सीमा के भीतर कब्जा नहीं देकर दोनों एग्रीमेंट की शर्तों का पालन करने में विफल रहा।

    प्राधिकरण ने कहा कि कब्जा सौंपने में देरी के मामले में, रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 18 में कहा गया है कि यदि आवंटी परियोजना से वापस लेना चाहते हैं, तो प्रमोटर अपार्टमेंट, प्लॉट या भवन के लिए प्राप्त राशि को इस अधिनियम के तहत प्रदान किए गए निर्धारित दर और मुआवजे पर ब्याज के साथ वापस करने के लिए उत्तरदायी है।

    इसलिए, प्राधिकरण ने बिल्डर को RERA, 2016 की धारा 18 (1) के तहत वादा किए गए समय सीमा के भीतर फ्लैट का कब्जा देने में विफल रहने के लिए होमबॉयर को 17,02,426 रुपये वापस करने का निर्देश दिया।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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