आग से घर को नुकसान: कुपवाड़ा कंज्यूमर कमीशन ने बजाज आलियांज को ₹10.87 लाख बीमा राशि देने का आदेश दिया
Praveen Mishra
9 Oct 2026 1:52 PM IST

कुपवाड़ा के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को आग से क्षतिग्रस्त बीमित मकान के नुकसान के एवज में शिकायतकर्ता अब राशिद भट को ₹10,87,366 देने का निर्देश दिया है।
आयोग ने कहा कि पुलिस और फायर एंड इमरजेंसी विभाग की रिपोर्ट में शिकायतकर्ता का नाम दर्ज नहीं होना, अपने आप में, उसके बीमा दावे को खारिज करने का आधार नहीं हो सकता। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इस आधार पर बीमा राशि को एक-तिहाई तक सीमित नहीं किया जा सकता कि संपत्ति शिकायतकर्ता और उसके दो भाइयों के संयुक्त स्वामित्व में है।
क्या था मामला?
शिकायतकर्ता अब राशिद भट ने जम्मू-कश्मीर बैंक की तरथपोरा, कुपवाड़ा शाखा से अपने आवासीय मकान के नवीनीकरण के लिए ₹16.50 लाख का ऋण लिया था। उनका मकान हफ्तराडा, तरथपोरा में स्थित है और बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के पास ₹72 लाख की बीमित राशि के लिए बीमित था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, बीमा पॉलिसी समय-समय पर नवीनीकृत की जाती रही और 28 जुलाई 2024 को जब मकान में आग लगी, तब भी पॉलिसी प्रभावी थी।
घटना के बाद उन्होंने बैंक और बीमा कंपनी को इसकी सूचना दी। इसके बाद बीमा कंपनी ने नुकसान का आकलन करने के लिए एक सर्वेयर नियुक्त किया।
शिकायतकर्ता ने दावा किया कि सर्वेयर द्वारा मांगे गए दस्तावेज जमा करने के बावजूद बीमा कंपनी ने उनके दावे का निपटारा नहीं किया। इसके बाद उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया और बीमा राशि, मुआवजे तथा मुकदमेबाजी के खर्च की मांग की।
बीमा कंपनी ने क्या दलील दी?
बीमा कंपनी ने सर्वे और जांच रिपोर्ट पर भरोसा करते हुए दावे पर आपत्ति जताई। रिपोर्ट में संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्ति में शिकायतकर्ता के हिस्से और नुकसान की सीमा को लेकर सवाल उठाए गए थे।
बीमा कंपनी के सर्वेयर ने कुल नुकसान ₹14,49,822 आंका। इसमें 25 प्रतिशत की कटौती के बाद शुद्ध नुकसान ₹10,87,366 निर्धारित किया गया।
हालांकि, संपत्ति शिकायतकर्ता और उनके दो भाइयों के संयुक्त स्वामित्व में होने के आधार पर सर्वेयर ने शुद्ध नुकसान का एक-तिहाई हिस्सा यानी ₹3,62,456 देने की सिफारिश की।
आयोग की टिप्पणियां
मामले पर विचार करते हुए आयोग ने कहा कि पुलिस और फायर एंड इमरजेंसी विभाग की रिपोर्ट में शिकायतकर्ता का नाम नहीं होने के आधार पर ही बीमा दावा खारिज नहीं किया जा सकता।
आयोग ने बीमा कंपनी के सर्वेयर द्वारा किए गए नुकसान के आकलन पर भी गौर किया। उसे बीमा पॉलिसी में ऐसा कोई विशिष्ट संविदात्मक प्रावधान नहीं मिला, जो शिकायतकर्ता की क्षतिपूर्ति को संपत्ति में उसके कथित हिस्से तक सीमित करता हो।
इस आधार पर आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता ₹10,87,366 के स्वीकार्य नुकसान की राशि पाने का हकदार है। आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया।
आयोग ने क्या आदेश दिया?
जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी को निम्नलिखित भुगतान करने का निर्देश दिया
₹10,87,366: आकलित नुकसान के लिए, शिकायत दर्ज करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 6 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ।
₹2 लाख: अनावश्यक परेशानी और बीमा दावे का निपटारा नहीं करने के लिए मुआवजे के रूप में।
₹20,000: मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में।
आयोग ने निर्देश दिया कि राशि उसके समक्ष जमा की जाए। शिकायतकर्ता शेष सह-स्वामियों से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) या सक्षम प्राधिकारी द्वारा उनके संबंधित अधिकारों के संबंध में जारी घोषणा प्रस्तुत करने के बाद राशि निकाल सकेगा।
आयोग ने स्पष्ट किया कि इस भुगतान से शिकायतकर्ता को संयुक्त संपत्ति पर विशेष स्वामित्व अधिकार नहीं मिलेगा और न ही इससे सह-स्वामियों के आपसी अधिकारों का निर्धारण होगा।
बीमा कंपनी को आदेश की तामील होने के 30 दिनों के भीतर इसका पालन करने का निर्देश दिया गया। ऐसा नहीं करने पर आदेश के तहत दी गई पूरी राशि पर आदेश की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 10 प्रतिशत सालाना ब्याज देना होगा।

