कन्फर्म टिकट होने के बावजूद सीट पर अवैध यात्रियों का कब्जा: उपभोक्ता आयोग ने रेलवे को ठहराया दोषी
Praveen Mishra
17 March 2026 12:29 PM IST

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, पालक्काड ने भारतीय रेलवे को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराया है। आयोग ने कहा कि रेलवे का कर्तव्य है कि कन्फर्म टिकट वाले यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा उपलब्ध कराए, लेकिन इस मामले में वह ऐसा करने में विफल रहा।
यह मामला उन यात्रियों से जुड़ा है, जिनमें दो वरिष्ठ नागरिक और उनका पुत्र शामिल थे। इन्होंने 10 दिसंबर 2023 को kanyakumari–Pune Express में ओट्टापालम/पालक्काड से तिरुपति तक के लिए स्लीपर क्लास के कन्फर्म टिकट बुक किए थे। हालांकि ट्रेन में चढ़ने पर उन्होंने पाया कि उनकी सीटों पर बिना आरक्षण और बिना टिकट वाले यात्री बैठे हुए थे।
शिकायत के अनुसार, स्लीपर कोच में अत्यधिक भीड़ थी, जहां यात्री फर्श और बर्थ के नीचे तक लेटे हुए थे, जिससे यात्रा बेहद असुविधाजनक हो गई। शिकायतकर्ताओं ने टीटीई और आरपीएफ कर्मियों को खोजने की कोशिश की, लेकिन कोई नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने Rail Madad ऐप के जरिए शिकायत दर्ज कराई, लेकिन लंबे समय तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
यात्रा के दौरान स्थिति और खराब होती गई, यहां तक कि वॉशरूम तक जाना भी मुश्किल हो गया। इसके बाद शिकायतकर्ताओं ने आयोग में याचिका दाखिल कर टिकट राशि ₹983 की वापसी, ₹75,000 मुआवजा, ₹25,000 मानसिक पीड़ा और ₹15,000 मुकदमेबाजी खर्च की मांग की।
रेलवे ने अपने पक्ष में कहा कि शिकायत में मंत्रालय को पक्षकार बनाना गलत है और दावा किया कि टीटीई और आरपीएफ ने विभिन्न स्टेशनों पर कार्रवाई कर अवैध यात्रियों को हटाया था। साथ ही यह भी कहा कि शिकायत लगभग एक वर्ष बाद की गई, जिससे इसका उद्देश्य केवल आर्थिक लाभ लेना प्रतीत होता है।
हालांकि आयोग ने रेलवे के इन तर्कों को खारिज कर दिया। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ताओं द्वारा प्रस्तुत टिकट, Rail Madad शिकायत के स्क्रीनशॉट और तस्वीरें स्पष्ट रूप से दिखाती हैं कि कोच में अत्यधिक भीड़ थी और कन्फर्म सीट वाले यात्री भी आराम से यात्रा नहीं कर पा रहे थे।
आयोग ने यह भी कहा कि रेलवे अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका और न ही टीटीई जैसे कर्मचारियों को गवाह के रूप में पेश किया।
आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि ऐसी परिस्थितियों में यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा उपलब्ध नहीं कराना सेवा में कमी है।
हालांकि, शिकायतकर्ताओं ने यात्रा पूरी कर ली थी, इसलिए आयोग ने टिकट राशि की वापसी से इनकार कर दिया।
आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए रेलवे को निर्देश दिया कि वह शिकायतकर्ताओं को ₹50,000 मुआवजा और ₹25,000 मुकदमेबाजी खर्च अदा करे।
साथ ही आदेश दिया गया कि यह राशि 45 दिनों के भीतर दी जाए, अन्यथा देरी होने पर रेलवे को ₹500 प्रति माह अतिरिक्त भुगतान (सोलैटियम) करना होगा।

