पूरी फीस लेने के बावजूद नहीं दी सभी रसीदें, उपभोक्ता आयोग ने IMS Learning को ठहराया दोषी

Praveen Mishra

21 May 2026 5:56 PM IST

  • पूरी फीस लेने के बावजूद नहीं दी सभी रसीदें, उपभोक्ता आयोग ने IMS Learning को ठहराया दोषी

    विदेश में पढ़ाई का सपना लेकर एक बी.टेक छात्र ने त्रिशूर स्थित IMS Learning Resources Pvt. Ltd. में GRE और IELTS कोचिंग के लिए दाखिला लिया।

    शुरुआत में उसने ₹18,500 देकर GRE कोर्स जॉइन किया, फिर बेहतर अवसर के भरोसे “GRE Admit Guarantee” प्रोग्राम के लिए अतिरिक्त ₹17,000 और IELTS कोचिंग के लिए ₹7,000 और जमा कर दिए। देखते ही देखते छात्र ने संस्थान को कुल ₹42,500 का भुगतान कर दिया।

    लेकिन छात्र प्रणीश के अनुसार, कुछ समय बाद उसे संस्थान की कार्यप्रणाली पर संदेह होने लगा। उसका आरोप था कि कक्षाएं समय पर शुरू नहीं हुईं और सबसे बड़ी बात यह कि पूरी फीस के बदले उसे सभी भुगतान की उचित रसीदें भी नहीं दी गईं। जब वह विदेश जाने लगा तो उसने फीस वापसी या अपनी सीट किसी दोस्त या रिश्तेदार को ट्रांसफर करने का अनुरोध किया, लेकिन संस्थान ने इनकार कर दिया।

    खुद को ठगा महसूस कर छात्र ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। दूसरी ओर, संस्थान ने दावा किया कि छात्र ने कक्षाओं में हिस्सा लिया था और बाद में सऊदी अरब जाने के कारण खुद ही कोर्स छोड़ दिया। संस्थान ने यह भी कहा कि उनकी नीति के अनुसार फीस वापस नहीं की जा सकती।

    मामला त्रिशूर जिला उपभोक्ता आयोग पहुंचा, जहां रिकॉर्ड खंगालने पर एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया।

    आयोग ने पाया कि संस्थान ने छात्र से कुल ₹42,500 लिए थे, लेकिन केवल ₹35,900 की ही रसीद जारी की। IELTS कोचिंग के लिए लिए गए ₹7,000 की कोई रसीद संस्थान पेश नहीं कर सका।

    आयोग की पीठ, जिसमें श्री सी.टी. साबू, श्रीमती स्रीजा एस. और श्री राम मोहन आर. शामिल थे, ने कहा कि फीस लेने के बाद उचित और सत्यापित रसीद जारी करना किसी भी सेवा प्रदाता की मूल जिम्मेदारी है। ऐसा न करना स्पष्ट रूप से “सेवा में कमी” है।

    हालांकि आयोग ने यह नहीं माना कि संस्थान ने पढ़ाई बिल्कुल नहीं कराई, क्योंकि छात्र इस आरोप को पर्याप्त साक्ष्यों से साबित नहीं कर पाया।

    लेकिन रसीद जारी न करने की लापरवाही को गंभीर मानते हुए आयोग ने IMS Learning Resources Pvt. Ltd. को छात्र को ₹15,000 मुआवजा और ₹5,000 मुकदमा खर्च देने का आदेश दिया। साथ ही भुगतान में देरी होने पर 9% वार्षिक ब्याज देने का निर्देश भी दिया गया।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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