खराब खाना, वाई-फाई और रखरखाव की सुविधा न देने पर हॉस्टल को चुकाने होंगे ₹40,000: कांगड़ा उपभोक्ता आयोग का आदेश

Praveen Mishra

15 July 2026 12:42 PM IST

  • खराब खाना, वाई-फाई और रखरखाव की सुविधा न देने पर हॉस्टल को चुकाने होंगे ₹40,000: कांगड़ा उपभोक्ता आयोग का आदेश

    जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, कांगड़ा (धर्मशाला) ने नालंदा लिविंग हॉस्टल को वादा किए गए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न कराने पर सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराया है। आयोग ने कहा कि अग्रिम शुल्क लेने के बावजूद रहने योग्य बुनियादी सुविधाएं, जैसे गुणवत्तापूर्ण भोजन, उचित रखरखाव और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध न कराना उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत सेवा में कमी का स्पष्ट मामला है।

    मामले में शिकायतकर्ता आर्यन रावत ने ग्रेटर नोएडा स्थित आईआईएलएम यूनिवर्सिटी में बी.टेक. में प्रवेश लेने के बाद नालंदा लिविंग हॉस्टल में एयर-कंडीशंड कमरा बुक कराया और ₹35,000 अग्रिम राशि जमा की। हॉस्टल ने गुणवत्तापूर्ण भोजन, कार्यशील वाई-फाई और बेहतर रखरखाव का आश्वासन दिया था।

    हालांकि, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि हॉस्टल में एक सप्ताह रहने के दौरान भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब थी, रखरखाव संतोषजनक नहीं था और वादा किए जाने के बावजूद वाई-फाई सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई। शिकायत करने के बाद उसने हॉस्टल छोड़ दिया। हॉस्टल प्रबंधन ने एक सप्ताह का शुल्क काटकर शेष राशि लौटाने का आश्वासन दिया, लेकिन कई अनुरोधों के बावजूद कोई धनवापसी नहीं की गई। इसके बाद शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग का रुख किया।

    नोटिस दिए जाने के बावजूद हॉस्टल आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद उसके विरुद्ध एकपक्षीय (Ex Parte) कार्यवाही की गई।

    आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत रसीद से यह सिद्ध होता है कि हॉस्टल ने ₹35,000 अग्रिम राशि प्राप्त की थी। आयोग ने कहा कि वादा की गई बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध न कराना सेवा में कमी है। चूंकि शिकायतकर्ता को एक सप्ताह के भीतर हॉस्टल छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा, इसलिए आयोग ने एक सप्ताह के रहने का ₹5,000 उचित शुल्क मानते हुए शेष ₹30,000 लौटाने का निर्देश दिया।

    इसके अलावा आयोग ने हॉस्टल को शिकायत दर्ज होने की तिथि से भुगतान तक 9% वार्षिक ब्याज सहित ₹30,000 लौटाने, ₹5,000 मानसिक उत्पीड़न के लिए तथा ₹5,000 वाद व्यय के रूप में अदा करने का आदेश दिया।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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