Haldiram's के एमडी पंकज अग्रवाल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट, आदेश का पालन न करने पर कार्रवाई

Praveen Mishra

16 April 2026 1:53 PM IST

  • Haldirams के एमडी पंकज अग्रवाल के खिलाफ गैर-जमानती वारंट, आदेश का पालन न करने पर कार्रवाई

    ज़िला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, केंद्रीय दिल्ली ने Haldiram's स्नैक्स प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक पंकज अग्रवाल के खिलाफ आदेश का पालन न करने पर गैर-जमानती वारंट जारी किया है।

    यह आदेश 9 अप्रैल 2026 को पारित किया गया। आयोग ने पाया कि संबंधित पक्ष ने न तो आदेश के अनुसार भुगतान किया और न ही सुनवाई के दौरान उपस्थित हुआ।

    आयोग का कड़ा रुख

    आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष दिव्या ज्योति जैपुरीयार और सदस्य डॉ. रश्मि बंसल शामिल थीं, ने डिक्री होल्डर के आवेदन पर सुनवाई करते हुए पंकज अग्रवाल की गिरफ्तारी के लिए गैर-जमानती वारंट जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्हें अगली सुनवाई, यानी 2 जून 2026 को आयोग के समक्ष पेश होने को कहा गया है।

    पहले भी की गई थी कार्रवाई

    इससे पहले 18 दिसंबर 2025 को आयोग ने आदेश के अनुपालन न होने पर कंपनी का बैंक खाता फ्रीज करने का निर्देश दिया था, जो कस्तूरबा गांधी मार्ग स्थित एचडीएफसी बैंक में है।

    क्या है मामला?

    यह मामला रामिंदर कौर द्वारा दायर उपभोक्ता शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में कहा गया था कि 2 सितंबर 2023 को किए गए ऑनलाइन फूड ऑर्डर पर ₹40 का पैकिंग चार्ज लिया गया था।

    आयोग का अंतिम आदेश

    4 नवंबर 2024 को आयोग ने शिकायत को सही मानते हुए कंपनी को निर्देश दिया था कि:

    पैकिंग चार्ज वसूलने की प्रथा बंद की जाए

    ₹40 की राशि ब्याज सहित वापस की जाए

    ₹10,000 दंडात्मक हर्जाना दिया जाए

    ₹5,000 मुकदमे का खर्च दिया जाए

    ₹40,000 उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा किए जाएं

    आदेश की अनदेखी पर सख्ती

    आयोग के आदेश का पालन न करने पर पहले बैंक खाता फ्रीज किया गया और अब गैर-जमानती वारंट जारी किया गया है।

    निष्कर्ष

    यह मामला स्पष्ट करता है कि उपभोक्ता अदालतों के आदेशों की अनदेखी करने पर सख्त कार्रवाई हो सकती है और जिम्मेदार अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जा सकता है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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