मोबाइल फोन की जगह Lifebuoy साबुन भेजने पर Flipkart को दोषी ठहराया, ₹10,574 का रिफंड और ₹10,000 अतिरिक्त देने का आदेश
Praveen Mishra
26 Oct 2026 5:14 PM IST

दिल्ली के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, साउथ-II ने ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म Flipkart Internet Pvt. Ltd. को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए दोषी ठहराया है। आयोग के सामने ऐसा मामला आया, जिसमें एक महिला ने Flipkart से Realme का स्मार्टफोन ऑर्डर किया था, लेकिन डिलीवरी में उसे मोबाइल फोन की जगह Lifebuoy साबुन की टिकियां मिलीं।
आयोग ने Flipkart को ₹10,574 की खरीद राशि पर 7% सालाना ब्याज के साथ रिफंड देने का निर्देश दिया। इसके अलावा, मानसिक परेशानी के लिए ₹5,000 और मुकदमे का खर्च उठाने के लिए ₹5,000 देने का आदेश दिया गया।
आयोग की अध्यक्ष मोनिका अग्रवाल श्रीवास्तव और सदस्य डॉ. राजेंद्र धर एवं ऋतु गरोड़िया की पीठ ने Flipkart की इस दलील को स्वीकार नहीं किया कि वह केवल खरीदारों और विक्रेताओं के बीच एक ऑनलाइन मध्यस्थ की भूमिका निभाता है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता मौसम मीणा ने Flipkart के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से Realme Narzo 50A स्मार्टफोन (Oxygen Blue, 128 GB) ₹10,574 में ऑर्डर किया था। 24 अक्टूबर 2021 के इनवॉइस के अनुसार, फोन Luminary Lifestyle Pvt. Ltd. द्वारा बेचा गया था।
शिकायतकर्ता के अनुसार, 25 अक्टूबर 2021 को जब उसे पैकेज मिला, तो उसमें मोबाइल फोन के बजाय Lifebuoy साबुन की टिकियां थीं।
इसके बाद उसने Flipkart से संपर्क किया और आधार कार्ड सहित जरूरी दस्तावेजों के साथ शिकायत दर्ज कराई। 17 नवंबर 2021 को Flipkart ने ईमेल के जरिए बताया कि विक्रेता उसकी रिटर्न रिक्वेस्ट पर कार्रवाई नहीं कर सकता, क्योंकि उत्पाद की तस्वीरें उपलब्ध नहीं कराई गई थीं।
शिकायतकर्ता ने इसके बाद कई ईमेल भेजकर कहा कि उसके पास स्क्रीनशॉट और अपने दावे के समर्थन में सबूत मौजूद हैं। उसने पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई।
समस्या का समाधान नहीं होने पर उसने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। उसने आर्थिक नुकसान के लिए ₹20,000 और मानसिक परेशानी एवं उत्पीड़न के लिए ₹50,000 के मुआवजे की मांग की।
Flipkart ने क्या दलील दी?
Flipkart ने आयोग के सामने कहा कि उसका प्लेटफॉर्म केवल खरीदारों और विक्रेताओं के बीच लेनदेन की सुविधा उपलब्ध कराता है। उसने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 79 का हवाला देते हुए मध्यस्थ के रूप में कानूनी संरक्षण का दावा किया।
Flipkart ने यह भी कहा कि उत्पाद और रिफंड की जिम्मेदारी विक्रेता Luminary Lifestyle Pvt. Ltd. की थी। उसके अनुसार, शिकायतकर्ता से पहचान संबंधी दस्तावेज और उत्पाद की तस्वीरें मांगी गई थीं, लेकिन उसने ये उपलब्ध नहीं कराईं।
कंपनी ने शिकायतकर्ता के खरीद इतिहास का भी हवाला दिया, जिसमें कथित तौर पर कई रिटर्न रिक्वेस्ट दर्ज थीं।
वहीं, लॉजिस्टिक्स सेवा प्रदाता Instakart ने कहा कि उसने विक्रेता से मिला सीलबंद पैकेज ही डिलीवर किया था।
आयोग ने Flipkart की दलील क्यों खारिज की?
आयोग ने शिकायत, दस्तावेजों, ईमेल, इनवॉइस और वीडियो रिकॉर्डिंग का परीक्षण किया। आयोग ने अपने 31 जुलाई 2026 के आदेश में दर्ज वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें शिकायतकर्ता को मोबाइल फोन के बजाय साबुन की टिकियां मिलने की बात सामने आई।
आयोग ने Rediff.com India Limited v. Ms. Urmil Munjal, 2013 (3) CLT 79 (NC) मामले में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के फैसले पर भी भरोसा किया।
आयोग ने कहा कि ऑनलाइन लेनदेन की सुविधा देने वाला ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म केवल मध्यस्थ होने का दावा करके अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकता। उसे ग्राहकों को जरूरी सहायता और शिकायत निवारण की सुविधा उपलब्ध करानी होती है।
इन तथ्यों के आधार पर आयोग ने Flipkart Internet Pvt. Ltd. को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए जिम्मेदार ठहराया।
आयोग ने क्या आदेश दिया?
आयोग ने Flipkart को निम्नलिखित भुगतान करने का निर्देश दिया:
₹10,574: खरीद राशि का रिफंड, 7% सालाना ब्याज के साथ।
₹5,000: मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा।
₹5,000: मुकदमे का खर्च।
आयोग ने आदेश का पालन करने के लिए 60 दिनों की समयसीमा तय की है। यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया जाता है, तो आदेश में तय शर्तों के अनुसार पूरी राशि पर आदेश की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 8% सालाना ब्याज लागू होगा।
इस फैसले में आयोग ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन मार्केटप्लेस ग्राहकों को केवल खरीदारी की सुविधा देकर अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त नहीं हो सकते। उन्हें शिकायतों का उचित समाधान करने और उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।

