एडवांस प्लॉट बुकिंग से आवंटन का अधिकार नहीं मिलता; खरीदार केवल रिफंड का हकदार: दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग
Praveen Mishra
26 Jan 2026 10:19 PM IST

दिल्ली राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, जिसकी पीठ में न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल (अध्यक्ष) और सुश्री बिमला कुमारी (सदस्य) शामिल थीं, ने कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया है। आयोग ने जिला आयोग के उस निष्कर्ष को बरकरार रखा, जिसमें बैंक को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराया गया था, क्योंकि बैंक ने बिना किसी संविदात्मक अधिकार के उधारकर्ता के गिरवी रखे गए सोने के आभूषणों की नीलामी कर दी थी।
आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा कि गोल्ड लोन से संबंधित सैंक्शन लेटर में डिफॉल्ट की स्थिति में गिरवी रखे गए आभूषणों की नीलामी का कोई प्रावधान नहीं था, और इसलिए बैंक की यह कार्रवाई कानूनी आधार से रहित थी।
पुरा मामला
शिकायतकर्ता श्रीमती सरमिला शर्मा ने अपने मकान के निर्माण के लिए 29.02.2020 को कोटक महिंद्रा बैंक से ₹77,000 का गोल्ड लोन लिया था। इस ऋण के लिए उन्होंने 35.90 ग्राम सोने के आभूषण, जिनका मूल्य ₹1,04,103.41 था, बैंक के पास गिरवी रखे थे।
शिकायतकर्ता ने 15.03.2020 से 15.01.2022 के बीच ऋण अदायगी के रूप में कुल ₹29,097.59 की राशि जमा की थी।
शिकायतकर्ता के अनुसार, उन्हें 27.10.2021 को बैंक से एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें कहा गया था कि यदि ₹3,260 की ब्याज राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो गिरवी रखे गए आभूषणों की नीलामी या बिक्री की जा सकती है। शिकायतकर्ता ने उसी दिन उक्त ब्याज राशि का भुगतान कर दिया। इसके बावजूद, बैंक ने कथित रूप से 30.03.2022 को सोने के आभूषणों की बिक्री कर दी, जिसकी जानकारी शिकायतकर्ता को 26.07.2022 को मिली।
इस नीलामी से आहत होकर, शिकायतकर्ता ने जिला उपभोक्ता आयोग का रुख किया और आरोप लगाया कि बैंक ने बिना पूर्व सूचना दिए, तथा नीलामी की तिथि, दर और प्रक्रिया की जानकारी साझा किए बिना, सोने के आभूषणों की बिक्री कर दी, जो कि सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है। शिकायतकर्ता ने हुए नुकसान की भरपाई, मानसिक उत्पीड़न के लिए मुआवज़ा, ब्याज और वाद व्यय की मांग की।
जिला आयोग का आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग ने यह पाया कि बैंक को शिकायत की प्रति प्राप्त होने के बावजूद उसने कोई जवाब दाखिल नहीं किया और न ही आयोग के समक्ष उपस्थित हुआ। परिणामस्वरूप, शिकायतकर्ता का पक्ष अविवादित रह गया।
आयोग ने यह सिद्धांत दोहराया कि उधारकर्ता को नीलामी की प्रक्रिया, बिक्री की तिथि और दर की जानकारी दिए जाने का अधिकार है। इन तथ्यों के आधार पर, जिला आयोग ने बैंक को सेवा में कमी का दोषी ठहराया और निर्देश दिया कि वह बकाया राशि समायोजित करने के बाद, 35.90 ग्राम सोने का मूल्य आदेश की तारीख पर प्रचलित बाजार दर के अनुसार शिकायतकर्ता को अदा करे।
राज्य आयोग में अपील
जिला आयोग के आदेश से असंतुष्ट होकर, कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड ने दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील दायर की।
बैंक की दलीलें
बैंक ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता ने 29.02.2020 के सैंक्शन लेटर की शर्तों को स्वीकार किया था और बकाया राशि न चुकाने के कारण 17.02.2022 को लोन रिकॉल नोटिस जारी किया गया था। बैंक का यह भी कहना था कि सोने की नीलामी कानून के अनुसार की गई थी और बकाया राशि समायोजित करने के बाद ₹9,357.17 की अतिरिक्त राशि शेष थी, जिसे शिकायतकर्ता से प्राप्त करने के लिए कहा गया था।
आयोग के अवलोकन और निर्णय
राज्य आयोग ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(11) के तहत “सेवा में कमी” में सेवा प्रदाता द्वारा की गई कोई भी चूक, लापरवाही या प्रासंगिक जानकारी का जानबूझकर अभाव शामिल है।
रिकॉर्ड का परीक्षण करने पर आयोग ने पाया कि यद्यपि बैंक ने लोन रिकॉल नोटिस जारी किया था, लेकिन सैंक्शन लेटर में गिरवी रखे गए आभूषणों की नीलामी की अनुमति देने वाला कोई प्रावधान नहीं था। आयोग ने कहा कि बैंक नीलामी के लिए किसी भी संविदात्मक या कानूनी आधार को स्थापित करने में विफल रहा, जिससे बैंक की दलील अस्वीकार्य हो गई।
जिला आयोग की दलीलों से सहमति जताते हुए, राज्य आयोग ने विवादित आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और कोटक महिंद्रा बैंक लिमिटेड द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया।

