विज्ञापन से कम मात्रा में उत्पाद देना 'दोष' और अनुचित व्यापार व्यवहार: उपभोक्ता आयोग

Praveen Mishra

25 March 2026 5:54 PM IST

  • विज्ञापन से कम मात्रा में उत्पाद देना दोष और अनुचित व्यापार व्यवहार: उपभोक्ता आयोग

    कोल्लम जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विज्ञापन में बताए गए वजन से कम मात्रा में सामान देना “दोष” (defect) है और यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत भ्रामक विज्ञापन तथा अनुचित व्यापार व्यवहार (unfair trade practice) माना जाएगा।

    आयोग, जिसकी अध्यक्षता श्रीमती एस.के. श्रीला (अध्यक्ष) और श्री स्टैनली हेरोल्ड (सदस्य) कर रहे थे, ने पाया कि विक्रेता लक्ष्मी एंटरप्राइजेज ने कम वजन वाले बीन बैग ग्रेन्स की आपूर्ति की, जिसके लिए उसे जिम्मेदार ठहराया गया और शिकायतकर्ता को राहत दी गई।

    आयोग ने यह भी कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म भले ही एक मध्यस्थ (intermediary) के रूप में कार्य करता हो, लेकिन यदि उसके सामने बार-बार शिकायतें लाई जाती हैं, तो वह पूरी तरह जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो सकता।

    मामले की पृष्ठभूमि

    शिकायतकर्ता, जो एक विधि छात्र है, ने 7 सितंबर 2024 को फ्लिपकार्ट के माध्यम से 2 किलोग्राम के रूप में विज्ञापित बीन बैग ग्रेन्स खरीदे।

    हालांकि, 14 सितंबर को डिलीवर उत्पाद का वजन केवल 1.540 किलोग्राम निकला।

    शिकायत के बाद 23 सितंबर को मिला रिप्लेसमेंट 1.470 किलोग्राम और 4 अक्टूबर को मिला दूसरा रिप्लेसमेंट 1.680 किलोग्राम निकला।

    बार-बार शिकायत और रिप्लेसमेंट के बावजूद उसे वादा किए गए वजन का उत्पाद नहीं मिला।

    शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने यह उत्पाद एक दुर्घटना के बाद शारीरिक सहारे (ergonomic support) के लिए खरीदा था, लेकिन कम वजन के कारण उसे असुविधा, शारीरिक कष्ट और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।

    प्रतिवादियों के तर्क

    फ्लिपकार्ट (पहला प्रतिवादी) ने कहा कि वह केवल एक मध्यस्थ है और उत्पाद की गुणवत्ता या मात्रा की जांच नहीं करता।

    उसने कहा कि वजन में कमी की जिम्मेदारी पूरी तरह विक्रेता की है और उसने प्लेटफॉर्म नीति के अनुसार रिप्लेसमेंट की सुविधा दी।

    दूसरा प्रतिवादी लक्ष्मी एंटरप्राइजेज उपस्थित नहीं हुआ और उसके खिलाफ एकतरफा (ex parte) कार्यवाही हुई।

    आयोग की टिप्पणियां

    आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य—जैसे बिल और कम वजन दर्शाने वाली तस्वीरें—अप्रमाणित नहीं रहीं।

    आयोग ने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 की धारा 2(10) के तहत “दोष” में मात्रा की कमी भी शामिल है, और कम वजन का उत्पाद देना स्पष्ट रूप से दोष है।

    साथ ही, इसे भ्रामक विज्ञापन और अनुचित व्यापार व्यवहार भी माना गया।

    फैसला

    आयोग ने शिकायत को स्वीकार करते हुए निर्देश दिए:

    लक्ष्मी एंटरप्राइजेज (दूसरा प्रतिवादी) शिकायतकर्ता को ₹764 वापस करे

    ₹10,000 मुआवजा अदा करे

    फ्लिपकार्ट और लक्ष्मी एंटरप्राइजेज संयुक्त रूप से ₹10,000 मुकदमा खर्च दें

    45 दिनों के भीतर भुगतान किया जाए, अन्यथा 9% ब्याज लागू होगा

    यह फैसला उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी तय करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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