पूरी राशि लेने के बावजूद बिजली कनेक्शन के लिए आवश्यक उपकरण नहीं दिए, उपभोक्ता आयोग ने विद्युत निगम पर लगाया ₹75,000 हर्जाना
Praveen Mishra
29 May 2026 4:33 PM IST

जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-I (उत्तर जिला) ने किसान को बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए पूरी राशि प्राप्त करने के बावजूद आवश्यक विद्युत अवसंरचना उपलब्ध न कराने पर Madhyanchal Vidyut Vitaran Nigam Limited (एमवीवीएनएल) को सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) का दोषी ठहराया है। आयोग ने निगम को 45 दिनों के भीतर आवश्यक उपकरण स्थापित करने का निर्देश दिया है तथा शिकायतकर्ता को ₹75,000 मुआवजा देने का आदेश भी दिया है।
मामले के अनुसार, मुकेश कुमार ने 19 जुलाई 2024 को अपने कृषि भूमि स्थित प्रमाणित बोरवेल के लिए “प्राइवेट ट्यूबवेल” बिजली कनेक्शन हेतु ऑनलाइन आवेदन किया था। निरीक्षण के बाद विद्युत निगम ने ट्रांसफॉर्मर, पोल और तारों सहित आवश्यक अवसंरचना का अनुमान जारी किया, जिसके आधार पर शिकायतकर्ता ने 13 अगस्त 2024 को ₹1,83,092 की पूरी राशि जमा कर दी।
हालांकि, अंतिम आवेदन जमा करने के बाद शिकायतकर्ता को पता चला कि आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता के लिए उससे पहले 500 से अधिक आवेदक प्रतीक्षा सूची में थे। शिकायतकर्ता का आरोप था कि निगम ने उपकरणों की अनुपलब्धता और संभावित देरी की जानकारी दिए बिना पूरी राशि वसूल ली। साथ ही उसे खुले बाजार से स्वयं उपकरण खरीदने की भी अनुमति नहीं दी गई।
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि बिजली कनेक्शन नहीं मिलने के कारण उसे गेहूं की फसल की सिंचाई के लिए 10 एचपी डीजल जनरेटर का उपयोग करना पड़ा, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा और कृषि उत्पादन भी प्रभावित हुआ।
मामले में नोटिस मिलने के बावजूद विद्युत निगम आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ, जिसके बाद आयोग ने एकतरफा (Ex-Parte) सुनवाई की।
आयोग ने कहा कि जब निगम ने पूरी राशि प्राप्त कर ली थी, तब उसका दायित्व था कि वह उचित समय के भीतर कनेक्शन उपलब्ध कराए। आयोग ने पाया कि निगम ने उपकरणों की कमी, प्रतीक्षा सूची और आपूर्ति में संभावित देरी जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां उपभोक्ता से छिपाईं, जो अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।
आयोग ने यह भी कहा कि सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं प्रदान करने वाले संस्थानों से अधिक जिम्मेदारी और संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है। पूरी राशि लेने के बाद उपभोक्ता को अनिश्चितकाल तक इंतजार कराना उसके अधिकारों का उल्लंघन है।
इन निष्कर्षों के आधार पर आयोग ने विद्युत निगम को 45 दिनों के भीतर आवश्यक ट्रांसफॉर्मर, पोल और अन्य उपकरण उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। आदेश का पालन न करने पर निगम को ₹1,000 प्रतिदिन की दर से जुर्माना देना होगा। इसके अतिरिक्त आयोग ने शिकायतकर्ता को मानसिक पीड़ा, आर्थिक नुकसान और असुविधा के लिए ₹75,000 मुआवजा देने का भी आदेश दिया।

