तुरंत सूचना के बावजूद अनधिकृत ट्रांजैक्शन रिवर्स न करने पर SBI Cards दोषी: चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग

Praveen Mishra

16 Feb 2026 3:42 PM IST

  • तुरंत सूचना के बावजूद अनधिकृत ट्रांजैक्शन रिवर्स न करने पर SBI Cards दोषी: चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग

    जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-II, केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ ने एसबीआई कार्ड्स एंड पेमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराया है, क्योंकि कंपनी ने कार्डधारक द्वारा तुरंत सूचना देने के बावजूद अनधिकृत क्रेडिट कार्ड लेनदेन का समाधान नहीं किया।

    आयोग के अध्यक्ष श्री अमरिंदर सिंह सिद्धू और सदस्य श्री बी.एम. शर्मा की पीठ ने कहा कि शिकायतकर्ता भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 6 जुलाई 2017 के परिपत्र के अनुसार “शून्य देनदारी” (Zero Liability) की हकदार थी। आयोग ने कंपनी को विवादित राशि ब्याज सहित लौटाने, शिकायतकर्ता का नाम सिबिल (CIBIL) रिकॉर्ड से हटाने तथा मुआवजा देने का निर्देश दिया।

    मामला क्या था

    शिकायतकर्ता रूपम कुमार उर्फ रूपम चावला के नाम पर एसबीआई का क्रेडिट कार्ड (नंबर 6048 से समाप्त) जारी हुआ था। 7 दिसंबर 2017 को उन्हें ₹10,000 और ₹999 के लेनदेन के OTP संदेश प्राप्त हुए, जबकि उन्होंने कोई लेनदेन नहीं किया था।

    उन्होंने उसी दिन एसबीआई कार्ड्स को सूचित किया, जिसके बाद कार्ड ब्लॉक कर दिया गया और शिकायत दर्ज हुई। बाद में 28 दिसंबर 2017 को उन्होंने ट्रांजैक्शन विवाद फॉर्म भी जमा किया तथा मोहाली साइबर क्राइम पुलिस और बैंकिंग लोकपाल के समक्ष भी शिकायत की।

    इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने 26 फरवरी 2018 को ₹17,050 जमा किए (विवादित राशि छोड़कर)। इसके बाद कंपनी ने ₹35,594 की मांग की, जिसे उन्होंने 12 अप्रैल 2021 को विरोध के साथ जमा किया। कंपनी ने उन्हें सिबिल में डिफॉल्टर भी घोषित कर दिया।

    कंपनी का पक्ष

    कंपनी ने वकील के माध्यम से उपस्थित होकर भी उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत निर्धारित 45 दिनों की अवधि में लिखित जवाब दाखिल नहीं किया, जिसके कारण उसका बचाव निरस्त कर दिया गया।

    आयोग के अवलोकन

    आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता ने अनधिकृत लेनदेन की सूचना उसी दिन दे दी थी और कार्ड तुरंत ब्लॉक कर दिया गया था।

    RBI के 6 जुलाई 2017 के परिपत्र “अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहक की देनदारी सीमित करना” का हवाला देते हुए आयोग ने कहा:

    समय पर सूचना देने पर ग्राहक की देनदारी शून्य होती है

    ग्राहक की जिम्मेदारी साबित करने का भार बैंक पर होता है

    चूंकि कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि लेनदेन अधिकृत थे और RBI के निर्देशों का पालन नहीं किया गया, इसलिए आयोग ने इसे सेवा में कमी माना।

    आयोग का आदेश

    आयोग ने शिकायत आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कंपनी को निम्न निर्देश दिए:

    ₹35,594 की राशि 12 अप्रैल 2021 से वसूली तक 9% वार्षिक ब्याज सहित लौटाई जाए

    शिकायतकर्ता का नाम डिफॉल्टर सूची/सिबिल रिकॉर्ड से हटाया जाए (यदि अभी तक नहीं हटाया गया हो)

    मानसिक उत्पीड़न और मुकदमेबाजी खर्च के लिए ₹10,000 का भुगतान किया जाए

    इस निर्णय से स्पष्ट हुआ कि समय पर सूचना देने पर अनधिकृत डिजिटल लेनदेन के मामलों में ग्राहक को RBI नियमों के तहत पूर्ण सुरक्षा प्राप्त है।

    Next Story