वादा किया गया फाइबर कनेक्शन न देने पर चंडीगढ़ उपभोक्ता आयोग ने रिलायंस जियो को दोषी ठहराया
Praveen Mishra
9 Jan 2026 9:13 PM IST

शिकायतकर्ता, सुशील कुमार अग्रवाल ने 13 मार्च 2024 को जियो से ऑप्टिक-फाइबर वायर्ड ब्रॉडबैंड लिया और पूरे साल के लिए ₹12,729 पहले ही दे दिए। अगले दिन कनेक्शन लगा दिया गया, लेकिन पता चला कि यह वायर्ड नहीं बल्कि वायरलेस है।
जब उन्होंने आपत्ति की, तो जियो वालों ने कहा कि यह वायरलेस कनेक्शन भी वायर्ड जैसा ही अनलिमिटेड डेटा देगा। लेकिन करीब 18 दिन बाद ही उन्हें मैसेज आने लगे कि उनका डेटा खत्म हो गया है और अब दोबारा रिचार्ज करना होगा।
ग्राहक ने क्या किया?
उन्होंने 3 अप्रैल 2024 को कनेक्शन बंद कराने और पैसे वापस करने की मांग की। कई बार फोन किया, ई-मेल भेजे और लिखित आवेदन भी दिए। जियो वालों ने डिवाइस वापस ले ली और कहा कि रिफंड हो जाएगा, लेकिन पैसा नहीं लौटाया।
आखिरकार उन्होंने उपभोक्ता अदालत में केस कर दिया। जियो अदालत में पेश ही नहीं हुआ, इसलिए मामला एकतरफा चला।
अदालत का फैसला
अदालत ने माना कि ग्राहक को गलत जानकारी देकर सेवा बेची गई और फिर पैसा भी वापस नहीं किया गया। यह सेवा में कमी और गलत व्यापार तरीका है।
इसलिए अदालत ने जियो को आदेश दिया:
₹12,729 पूरा पैसा 9% ब्याज के साथ लौटाए
इसके अलावा ग्राहक को ₹7,000 परेशानी और केस खर्च के लिए दे
यानि जियो को ग्राहक को उसका पैसा ब्याज समेत लौटाना होगा और अतिरिक्त मुआवजा भी देना होगा।

