गलत कैमरा डिलीवरी और रिफंड से इनकार पर अमेज़न व विक्रेता को ₹3.25 लाख हर्जाना देने का आदेश
Praveen Mishra
27 Jun 2026 12:15 PM IST

दार्जिलिंग जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने अमेज़न सेलर सर्विस प्राइवेट लिमिटेड और क्लिकटेक रिटेल प्राइवेट लिमिटेड को गलत उत्पाद डिलीवर करने और बाद में रिफंड देने से इनकार करने के मामले में सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराया। आयोग ने दोनों पक्षों को संयुक्त रूप से खरीदी गई राशि लौटाने तथा विभिन्न मदों में मुआवजा देने का निर्देश दिया।
आयोग के अध्यक्ष टिकेंद्र नारायण प्रधान और महिला सदस्य भावना ठाकुर की पीठ ने यह आदेश शिकायतकर्ता सोलोमन लेपचा की शिकायत पर पारित किया।
मामले के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अमेज़न के माध्यम से पंजीकृत विक्रेता क्लिकटेक रिटेल प्राइवेट लिमिटेड से ₹1,43,000 का Fujifilm X-T5 मिररलेस कैमरा खरीदा था। 10 फरवरी 2025 को डिलीवरी मिलने पर उसने पाया कि पैकेज में ऑर्डर किया गया कैमरा नहीं, बल्कि Fujifilm X-T50 कैमरा भेजा गया है। पैकेज पर दो अलग-अलग लेबल भी लगे थे, जिनमें एक पर X-T50 और दूसरे पर X-T5 लिखा था।
शिकायतकर्ता ने तत्काल इसकी सूचना अमेज़न और विक्रेता को दी। दोनों ने कैमरा वापस लेकर रिफंड देने पर सहमति जताई और 20 फरवरी 2025 को उत्पाद वापस प्राप्त कर लिया। इसके बावजूद ₹1,43,000 की राशि वापस नहीं की गई। बाद में ग्राहक सहायता ने दावा किया कि जांच में उनकी कोई गलती नहीं पाई गई और आरोप लगाया कि शिकायतकर्ता ने गलत उत्पाद वापस भेजा है। 21 फरवरी 2025 को अमेज़न ने ईमेल भेजकर यह भी कहा कि लौटाया गया उत्पाद "उपयोग किया हुआ और क्षतिग्रस्त" था। शिकायतकर्ता द्वारा विरोधाभासी लेबल वाली तस्वीरें उपलब्ध कराने के बावजूद रिफंड अस्वीकार कर दिया गया।
मामले की सुनवाई के दौरान दोनों विपक्षी पक्ष आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं हुए और न ही अपना लिखित जवाब दाखिल किया। इसके चलते आयोग ने मामले की एकतरफा (ex parte) सुनवाई की।
आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता के दावों और साक्ष्यों का विपक्षियों द्वारा कोई खंडन नहीं किया गया है। रिकॉर्ड पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आयोग ने माना कि गलत उत्पाद की डिलीवरी और रिफंड से इनकार सेवा में स्पष्ट कमी है।
आयोग ने शिकायत स्वीकार करते हुए अमेज़न और क्लिकटेक रिटेल प्राइवेट लिमिटेड को संयुक्त रूप से ₹1,43,000 की खरीद राशि लौटाने, मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए ₹2 लाख, लापरवाही एवं सेवा में कमी के लिए ₹1 लाख तथा वाद व्यय के रूप में ₹25,000 का भुगतान करने का निर्देश दिया।

