2 घंटे बस में बिना पानी-भोजन बिठाने पर एलायंस एयर दोषी, वरिष्ठ नागरिक को ₹1 लाख मुआवज़ा

  • 2 घंटे बस में बिना पानी-भोजन बिठाने पर एलायंस एयर दोषी, वरिष्ठ नागरिक को ₹1 लाख मुआवज़ा

    दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एलायंस एयर एविएशन लिमिटेड को सेवा में गंभीर कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराते हुए एक वरिष्ठ नागरिक महिला यात्री को ₹1 लाख का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। आयोग ने पाया कि एयरलाइन ने तकनीकी खराबी के बाद यात्रियों को दो घंटे से अधिक समय तक एयरपोर्ट शटल बस में बिना मूलभूत सुविधाओं के बैठाए रखा और प्री-बुक भोजन भी उपलब्ध नहीं कराया।

    आयोग की पीठ — अध्यक्ष मोनिका ए. श्रीवास्तव और सदस्य किरण कौशल — ने कहा कि यह व्यवहार विशेष रूप से एक बुजुर्ग और मधुमेह से पीड़ित यात्री के प्रति अत्यंत असंवेदनशील था।

    मामला क्या था

    शिकायतकर्ता श्रीमती शशि सिंघई ने 18 दिसंबर 2021 को नई दिल्ली से बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के लिए भोजन सहित इकोनॉमी क्लास टिकट बुक की थी। उड़ान सुबह 9:50 बजे निर्धारित थी, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण इसे पहले 11:15 बजे तक टाल दिया गया।

    यात्रियों के विमान में बैठने के बाद अचानक खराबी की घोषणा कर उन्हें उतार दिया गया और एयरपोर्ट शटल बस में बैठा दिया गया, जहां उन्हें दो घंटे से अधिक समय तक बिना पानी, भोजन या शौचालय सुविधा के इंतज़ार करना पड़ा। शिकायतकर्ता वरिष्ठ नागरिक और डायबिटिक होने के कारण इस दौरान गंभीर परेशानी में रहीं।

    उड़ान में और भी परेशानी

    उड़ान अंततः करीब 1:30 बजे रवाना हुई, लेकिन बिलासपुर के बजाय रायपुर ले जाया गया। यात्रा के दौरान प्री-बुक भोजन नहीं दिया गया और पानी भी केवल मांगने पर उपलब्ध कराया गया। शाम करीब 6 बजे रायपुर पहुँचने पर एयरलाइन ने आगे की यात्रा के लिए कोई सहायता नहीं दी, जिसके बाद शिकायतकर्ता को ₹1,700 खर्च कर टैक्सी से बिलासपुर जाना पड़ा। वह पूरे दिन बिना भोजन के रहीं।

    एयरलाइन का पक्ष

    एयरलाइन ने तर्क दिया कि:

    देरी इंजीनियरिंग समस्या के कारण हुई

    बिलासपुर में खराब मौसम के कारण विमान रायपुर डायवर्ट किया गया

    शटल बस एयरलाइन के नियंत्रण में नहीं थी

    DGCA नियमों के तहत असाधारण परिस्थितियों में जिम्मेदारी नहीं बनती

    आयोग की सख्त टिप्पणी

    आयोग ने कहा कि तकनीकी समस्या होने पर यात्रियों को बस में रोके रखने के बजाय टर्मिनल के अंदर सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए थीं। यात्रियों को “बस में बंद” रखना अनुचित था।

    आयोग ने यह भी पाया कि एयरलाइन खराब मौसम का कोई प्रमाण पेश नहीं कर सकी और प्री-बुक भोजन न देने के आरोप का भी खंडन नहीं किया गया।

    फैसला

    आयोग ने एलायंस एयर को सेवा में भारी कमी का दोषी मानते हुए आदेश दिया कि:

    शिकायतकर्ता को ₹1,00,000 का मुआवज़ा दिया जाए

    भुगतान 3 महीने के भीतर किया जाए

    देरी होने पर 5% वार्षिक ब्याज देना होगा

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story