सिर्फ ससुराल जाकर पत्नी को वापस आने को कहना पर्याप्त नहीं, उचित कारण से अलग रहने का अधिकार: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट
Amir Ahmad
26 Sept 2026 3:56 PM IST

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि केवल पति का बार-बार पत्नी के मायके जाना या वैवाहिक साथ फिर शुरू करने की इच्छा जताते हुए कानूनी नोटिस भेजना इस बात का प्रमाण नहीं है कि पत्नी बिना उचित कारण के पति से अलग रह रही थी।
जस्टिस पार्थ प्रीतम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की खंडपीठ ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 (Hindu Marriage Act) की धारा 9 के तहत पति की ओर से दायर याचिका खारिज करने वाला फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखते हुए यह टिप्पणी की।
मामले में पति का कहना था कि पत्नी की मां की तबीयत खराब होने की सूचना मिलने के बाद वह पत्नी को उसके मायके छोड़कर आया था। इसके बाद उसने पत्नी से वापस आने के लिए कई बार अनुरोध किया, लेकिन वह लौटने को तैयार नहीं हुई।
वहीं पत्नी ने आरोप लगाया कि पति और उसके परिवार के सदस्यों ने उसके साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की तथा क्रेटा कार और 5 लाख रुपये नकद की मांग की। उसने यह भी बताया कि उसका गर्भपात हुआ था और पति के किसी दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाया।
हाईकोर्ट ने माना कि पत्नी अलग रह रही थी, यह तथ्य स्वीकार है, लेकिन पति यह साबित नहीं कर सका कि उसका वैवाहिक साथ छोड़ना हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 9 के अर्थ में बिना उचित कारण के था।
खंडपीठ ने कहा कि सवाल केवल यह नहीं है कि पत्नी पति से अलग रह रही है या नहीं, बल्कि यह भी देखना होगा कि उसके अलग रहने के पीछे पर्याप्त और उचित कारण था या नहीं।
अदालत ने कहा कि पत्नी के साथ कथित दुर्व्यवहार, मारपीट, दहेज की मांग और गर्भपात से जुड़े हालात महत्वपूर्ण हैं। इन तथ्यों को उसके द्वारा की गई शिकायतों और घरेलू हिंसा की कार्यवाही के साथ देखा जाना चाहिए।
खंडपीठ ने कहा कि इन सभी परिस्थितियों को एक साथ देखने पर उन्हें इस सवाल के लिए पूरी तरह अप्रासंगिक नहीं माना जा सकता कि पत्नी के पास अलग रहने का उचित आधार था या नहीं। अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण माना कि पति ने पत्नी के शैक्षणिक और अन्य सार्वजनिक दस्तावेज अपने पास रखे हुए थे।
हाईकोर्ट ने माना कि पत्नी ने पति से अलग रहने के लिए उचित और विश्वसनीय कारण बताया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि पति का बार-बार पत्नी के मायके जाना या वैवाहिक साथ फिर शुरू करने की इच्छा जताते हुए कानूनी नोटिस भेजना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि पत्नी का वापस लौटने से इनकार करना बिना उचित कारण के था।
खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट के फैसले में कोई कानूनी त्रुटि, गंभीर कमी या ऐसा आधार नहीं पाया जिसके कारण उसमें हस्तक्षेप किया जाए। इसके साथ ही पति की अपील खारिज की गई और फैमिली कोर्ट का फैसला बरकरार रखा गया।

