RTI आवेदन के समय संबंधित विभाग में तैनात नहीं थे तो देरी के लिए अधिकारी जिम्मेदार नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 25 हजार रुपये का जुर्माना रद्द किया
Amir Ahmad
12 Oct 2026 11:58 AM IST

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सूचना का अधिकार (RTI Act) के तहत दो तहसीलदारों पर लगाया गया 25 हजार रुपये का जुर्माना रद्द किया। कोर्ट ने कहा कि जब RTI आवेदन दाखिल किए जाने और प्रथम अपील के समय दोनों अधिकारी संबंधित तहसील में तैनात ही नहीं थे तो सूचना देने में देरी के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी पाया कि राज्य सूचना आयोग ने अधिकारियों के जवाबों पर विचार किए बिना आदेश पारित किया था।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद इस याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग के 19 अप्रैल 2021 के आदेश को चुनौती दी गई। आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 20(2) के तहत दोनों अधिकारियों पर जुर्माना लगाने के साथ उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया।
मामले के अनुसार गोविंद पटेल ने 18 जून 2018 को तत्कालीन तहसीलदार-सह-लोक सूचना अधिकारी के समक्ष RTI आवेदन दाखिल किया। इसमें नगर पंचायत धमधा के अंतर्गत तालाबों की स्थिति और उन पर हुए अतिक्रमण से संबंधित जानकारी मांगी गई।
निर्धारित 30 दिनों के भीतर जानकारी नहीं मिलने पर आवेदक ने प्रथम अपील दाखिल की और बाद में राज्य सूचना आयोग का रुख किया। इसके बाद आयोग ने विवादित आदेश पारित करते हुए दोनों तहसीलदारों पर जुर्माना लगाया और अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता अधिकारियों ने हाईकोर्ट में दलील दी कि जिस अवधि में RTI आवेदन पर जानकारी उपलब्ध कराई जानी थी, उस समय वे धमधा में लोक सूचना अधिकारी के रूप में तैनात नहीं थे। इसलिए जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि RTI आवेदन में मांगी गई जानकारी स्पष्ट नहीं थी और उन्होंने राज्य सूचना आयोग के समक्ष अपने जवाब भी दाखिल किए थे। इसके बावजूद आयोग ने आदेश में यह निष्कर्ष निकाला कि अधिकारियों ने जवाब नहीं दिया।
प्रतिवादियों ने आयोग के आदेश का समर्थन किया लेकिन यह स्वीकार किया कि दोनों अधिकारियों ने वास्तव में अपने-अपने जवाब दाखिल किए। बाद में ये जवाब किसी दूसरी फाइल में मिले थे।
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद पाया कि दोनों अधिकारियों ने अपने जवाब विधिवत दाखिल किए। इसलिए आयोग का यह निष्कर्ष कि उन्होंने जवाब प्रस्तुत नहीं किए रिकॉर्ड से साबित नहीं होता। कोर्ट ने यह भी कहा कि जब RTI आवेदन दाखिल किए जाने के समय याचिकाकर्ता संबंधित तहसील में तैनात ही नहीं थे, तो उन पर सूचना उपलब्ध नहीं कराने की जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती।
कोर्ट ने RTI आवेदन में मांगी गई जानकारी को भी अस्पष्ट पाया। इसमें पर्याप्त विवरण नहीं था, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि आवेदक वास्तव में कौन-सी विशिष्ट जानकारी चाहता था। हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य सूचना आयोग ने जुर्माना लगाने का फैसला करते समय इस पहलू पर भी विचार नहीं किया।
इन तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली और 19 अप्रैल 2021 के राज्य सूचना आयोग के आदेश को रद्द कर दिया। हालांकि, आदेश को उसी सीमा तक निरस्त किया गया, जहां तक दोनों याचिकाकर्ताओं पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

