नर्सिंग होम को सील करने का अधिकार नगर निगम के पास नहीं: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कार्रवाई रद्द की
Amir Ahmad
5 Oct 2026 3:21 PM IST

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ नर्सिंग होम अधिनियम और उसके नियमों के तहत नगर निगम को किसी नर्सिंग होम को सील करने का वैधानिक अधिकार नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि क्लिनिकल संस्थानों के नियमन और निगरानी का अधिकार जिला कलेक्टर में निहित है और नगर निगम आयुक्त के पास नर्सिंग होम के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करने की वैधानिक शक्ति नहीं है।
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद ने नगर निगम आयुक्त की ओर से जारी उस नोटिस को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की, जिसके आधार पर याचिकाकर्ता के नर्सिंग होम को कथित अनियमितताओं, नर्सिंग होम अधिनियम के प्रावधानों का पालन नहीं करने और जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी नियमों के उल्लंघन के आरोप में सील कर दिया गया।
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि नगर निगम आयुक्त के पास नर्सिंग होम को सील करने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। इसलिए नोटिस जारी करना और उसके आधार पर परिसर को सील करना पूरी तरह अधिकार क्षेत्र से बाहर की कार्रवाई है।
याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारियों ने उपलब्ध दस्तावेजों और रिकॉर्ड पर उचित विचार किए बिना कानून में अधिकार न होने के बावजूद नर्सिंग होम को सील किया। इससे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत व्यापार और व्यवसाय करने के उसके मौलिक अधिकार का भी उल्लंघन हुआ।
हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य उपचारगृह तथा रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2010 की धारा 9 का उल्लेख करते हुए कहा कि नर्सिंग होम का लाइसेंस निलंबित या रद्द करने की प्रक्रिया इसी प्रावधान से नियंत्रित होती है। इसके तहत सक्षम पर्यवेक्षण प्राधिकारी को प्रस्तावित कार्रवाई के आधार और कारण बताते हुए 30 दिन का नोटिस देना होता है, संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर देना होता है और उसके बाद कारणों वाला आदेश पारित करना होता है।
कोर्ट ने कहा कि नगर निगम को नर्सिंग होम का लाइसेंस जारी करने, उसके नियमन या लाइसेंस रद्द करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया। न ही अधिनियम या नियमों के तहत नगर निगम के पास नर्सिंग होम को सील करने की कोई वैधानिक शक्ति है।
कोर्ट ने कहा,
“दुर्ग नगर निगम को लाइसेंस जारी करने, उसका नियमन करने या रद्द करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया और न ही अधिनियम या नियमों के तहत उसके पास नर्सिंग होम को सील करने की कोई वैधानिक शक्ति है। इसलिए इस क्षेत्र में वैधानिक अधिकार न होने के बावजूद नगर निगम आयुक्त ने 15 दिसंबर 2022 को नोटिस जारी कर नर्सिंग होम को सील करके स्पष्ट कानूनी त्रुटि की।”
हाईकोर्ट ने यह भी गौर किया कि नगर निगम पहले ही अदालत के समक्ष स्वीकार कर चुका था कि नर्सिंग होम अधिनियम के तहत जिला कलेक्टर ही सक्षम प्राधिकारी हैं।
हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता जैव-चिकित्सीय अपशिष्ट प्रबंधन से जुड़े नियमों और अन्य वैधानिक लाइसेंस संबंधी आवश्यकताओं का पालन करने के लिए बाध्य है। यदि किसी तरह का उल्लंघन पाया जाता है तो सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार उचित कार्यवाही शुरू कर सकता है।
इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने 15 दिसंबर 2022 को जारी नोटिस और उसके परिणामस्वरूप नर्सिंग होम को सील करने की कार्रवाई रद्द की तथा रिट याचिका का निपटारा किया।

