बॉम्बे हाईकोर्ट के जज की तरफ पर्स फेंकने की कोशिश करने वाली महिला ने मांगी माफी

  • बॉम्बे हाईकोर्ट के जज की तरफ पर्स फेंकने की कोशिश करने वाली महिला ने मांगी माफी

    बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को एक महिला वादी के खिलाफ 'अदालत की अवमानना' (Contempt of Court) की कार्यवाही शुरू करने से इनकार किया। इस महिला ने 27 अक्टूबर को अपने खिलाफ आदेश आने के बाद जज की तरफ अपना पर्स फेंकने की कोशिश की थी।

    अंधेरी उपनगर की रहने वाली इस महिला वादी मिंदर गुरमीत सिंह ठुकराल अपने परिवार के सदस्यों के साथ कोर्ट रूम में मौजूद थीं। जैसे ही उनके परिवार के खिलाफ विवादित जगह को खाली करने का आदेश आया, उन्होंने अपना पर्स उठाया और उसे जज की तरफ फेंकने के लिए ऊपर किया, लेकिन तुरंत ही खुद को रोक लिया।

    वह फिर से कोर्ट हॉल में मौजूद थीं। इस बार उन्होंने अपने "अनुचित" व्यवहार के लिए माफी मांगी और जस्टिस माधव जामदार (जिनकी तरफ उन्होंने पर्स फेंकने की कोशिश की थी) से उन्हें माफ करने का आग्रह किया।

    बिना किसी शर्त के माफी मांगते हुए महिला ने कहा,

    "मुझसे गलती हो गई... कृपया मुझे माफ कर दीजिए।"

    बिना शर्त माफी मांगने के अलावा, महिला ने 1 लाख रुपये का हर्जाना (Costs) देने की भी बात कही।

    इन बातों पर विचार करने के बाद जज ने कहा कि वह उनके खिलाफ अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू नहीं करेंगे।

    गौरतलब है कि 27 अक्टूबर को जस्टिस जामदार की अदालत में नियमित सुनवाई के दौरान चौंकाने वाली घटना हुई, जब उन्होंने देखा कि महिला ने उनकी तरफ पर्स फेंकने की कोशिश की, लेकिन तुरंत खुद को रोक लिया। यह देखकर जस्टिस जामदार ने हाईकोर्ट पुलिस स्टाफ को बुलाकर उस महिला को अपनी अदालत से बाहर करवा दिया था।

    उस समय काफी नाराज दिख रहे जस्टिस जामदार ने कहा था,

    "यह किस तरह का बर्ताव है? क्या वादियों को लगता है कि वे अदालत के साथ कुछ भी कर सकते हैं? सिर्फ इसलिए कि आपके खिलाफ कोई आदेश आया है, इसका मतलब यह नहीं है कि आप इस तरह का व्यवहार करेंगे... आपको अदालत की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए... वादियों के बीच एक कड़ा संदेश जाना चाहिए... यह अदालत कभी भी डर या पक्षपात में आकर कोई आदेश नहीं देगी।"

    हालांकि, उस दिन के तुरंत बाद दी गई लिखित माफ़ी से जज प्रभावित नहीं हुए। उन्होंने संकेत दिया कि वे याचिकाकर्ता पर भारी जुर्माना लगाएंगे और यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनके खिलाफ 'अदालत की अवमानना' (कंटेंप्ट ऑफ कोर्ट) की कार्यवाही शुरू की जाएगी।

    लेकिन जज ने उन्हें माफ़ किया और अदालत की अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करने से इनकार किया।

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