सनातन धर्म को लेकर जस्टिस स्वामीनाथन का भावुक बयान, कहा- उम्मीद है कार्यकाल खत्म होने से पहले मेरा पद नहीं छीना जाएगा
Shahadat
27 Jan 2026 5:36 PM IST

शनिवार को एक प्राइवेट अवॉर्ड सेरेमनी में बोलते हुए मद्रास हाईकोर्ट जज जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने कहा कि वह हाईकोर्ट जज के तौर पर अपने बाकी कार्यकाल में सनातन धर्म को अपने दिल के करीब रखेंगे।
जज धारा फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक "दिव्य पुरस्कार" समारोह में बोल रहे थे। जज ने एक दीपक जलाया, जो तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ियों के ऊपर पत्थर के खंभे जैसा दिख रहा था और उन्होंने टिप्पणी की कि उन्हें "उम्मीद है कि यह दीपक कोई सर्वे का पत्थर नहीं है"।
जज ने यह भी कहा कि उन्हें विश्वास है कि उनकी 4.5 साल की सेवा बाकी है और उम्मीद है कि उन्हें उससे पहले उनके पद से नहीं हटाया जाएगा। यह बयान विपक्षी पार्टियों के सांसदों द्वारा जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने के बाद आया।
जज ने अपने संबोधन में कहा,
"मुझे विश्वास है कि मेरी 4.5 साल की सेवा बाकी है। उम्मीद है, वे उससे पहले मेरा पद नहीं छीनेंगे। बाकी 4.5 सालों में मैं बेहतरीन काम करना चाहता हूं और सनातन धर्म को अपने दिल में रखना चाहता हूं। इस कार्यक्रम ने मुझे वह आत्मविश्वास दिया।"
तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ी पर दीपक जलाने के संबंध में जज के हालिया आदेश ने देश में काफी बहस छेड़ दी। जहां कुछ लोगों ने फैसले का स्वागत किया और राय दी कि इसने हिंदू समुदाय के अधिकारों की रक्षा की, वहीं कई लोगों ने राज्य में कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा करने की संभावना के लिए आदेश की आलोचना भी की।
1 दिसंबर को जज ने अरुलमिघु सुब्रमण्य स्वामी मंदिर के मैनेजमेंट को 3 दिसंबर को शाम 6 बजे दीपक जलाने का आदेश दिया। इसके बाद 3 दिसंबर को याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की, जिसमें आरोप लगाया गया कि आदेश का पालन करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की गई। इसके बाद जज ने याचिकाकर्ता-भक्त को, 10 और लोगों के साथ खुद दीपक जलाने की अनुमति दी। इसने CISF से याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा देने के लिए भी कहा।
हालांकि, जब याचिकाकर्ता भक्त दीपक जलाने के लिए उस इलाके में पहुंचे तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। कलेक्टर ने निषेधाज्ञा लगा दी और पुलिस कमिश्नर ने निषेधाज्ञा को देखते हुए दीपक जलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।
हालांकि, अपील दायर की गई, लेकिन एक डिवीजन बेंच ने सिंगल जज का आदेश बरकरार रखा। इस बीच DMK और दूसरी विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने लोकसभा स्पीकर के सामने जस्टिस जीआर स्वामीनाथन पर दुर्व्यवहार के आरोप में महाभियोग चलाने का प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष ने तर्क दिया कि जज का व्यवहार उनकी निष्पक्षता, पारदर्शिता और धर्मनिरपेक्ष कामकाज पर सवाल उठाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जज ने एक सीनियर वकील और एक खास समुदाय के वकीलों के प्रति "पक्षपात" किया।
महाभियोग प्रस्ताव के बाद सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के पूर्व जजों ने एक बयान जारी कर इस कदम की आलोचना की और इसे "समाज के एक खास वर्ग की वैचारिक और राजनीतिक उम्मीदों के हिसाब से काम न करने वाले जजों को डराने-धमकाने की बेशर्म कोशिश" बताया।

