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उन्नाव में मौतों का मामला- "जांच सीबीआई को सौंपी जाए," इलाहाबाद हाईकोर्ट को भेजी गई पत्र याचिका में मांग

LiveLaw News Network
22 Feb 2021 3:58 PM GMT
उन्नाव में मौतों का मामला- जांच सीबीआई को सौंपी जाए, इलाहाबाद हाईकोर्ट को भेजी गई पत्र याचिका में मांग
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इलाहाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को एक पत्र-याचिका भेजी गई है, जिसमें उन्नाव जिले आसोहा पुलिस स्टेशन के तहत बाबहारा गांव में दो नाबालिग दलित लड़कियों की संदिग्ध हत्या और तीसरी लड़की, जिसकी स्‍थति गंभीर है, के मामले का संज्ञान लेने का अनुरोध किया गया है।

याचिकाकर्ता निलीम दत्ता (अध्यक्ष, एकीकृत जन आंदोलन) द्वारा भेजे गए प्रतिनिधित्व/जनहित याचिका में कहा गया है कि "यह भरोसा नहीं पैदा हो पा रहा है कि उन्नाव पुलिस वर्तमान मामले में न्याय करेगी।"

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार (17 फरवरी) शाम को एक खेत में तीन दलित लड़कियां, जिनकी उम्र 13, 16 और 17 वर्ष थी, बेहोश पाई गईं। रिश्तेदारों के अनुसार, तीनों चारा इकट्ठा करने के लिए खेत में गई थीं। छोटी बहनों की मौत हो गई, जबकि 17 वर्षीय लड़की को कानपुर के एक अस्पताल में भर्ती किया गया था।

उन्नाव पुलिस ने 18.02.2021 को लगभग 11:45 बजे आईपीसी की धारा 302 और 201 के तहत मामला दर्ज किया है। मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का दावा है, सबसे बड़ी लड़की ने उन दो लोगों को रिजेक्ट कर दिया ‌था, जिसके बाद उन्होंने तीनों लड़कियों को जहर दिया।

याचिकाकर्ता ने कहा है कि उन्हें वर्तमान परिस्थितियों और तात्कालिकता ने समान्य प्रक्रिया के जर‌िए औपचारिक याचिका दायर करना बेहद कठिन कर दिया है, और न ही पीड़ित का परिवार माननीय न्यायालय से संपर्क करने की स्थिति में है, इसलिए उन्हें ईमेल के माध्यम से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।

याचिकाकर्ता ने दलील में कहा है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को 18 फरवरी 2021 को ईमेल के माध्यम से औपच‌ारिक रूप से लिखा था कि एक मात्र जीवित लड़की को एयर-एम्बुलेंस के माध्यम से एम्स भर्ती कराया जाए और उसकी जान बचाई जाए, हालांकि कोई जवबा नहीं मिला।

प्रतिनिधित्व / पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि मृतक लड़कियों के परिजनों ने 18 फरवरी 2021 को मीडिया के सामने आरोप लगाया गया है कि उन्नाव पुलिस ने पीड़िताओं के पिता, भाई सहित कम से कम चार पुरुष परिजनों को हिरासत में लिया है।

यह भी आरोप लगाया गया है कि दोनों मृतक लड़कियों के शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया था, उन्नाव पुलिस / उत्तर प्रदेश पुलिस ने परिवार पर रात में शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए दबाव डाला था।

याचिकाकर्ता की आशंका

पत्र में कहा गया है, "जिस प्रकार उत्तर प्रदेश राज्य, उत्तर प्रदेश सरकार और विशेष रूप से उत्तर प्रदेश पुलिस ने यौन हमलों के मामले में जांच नहीं करने या जांच को कमजोर करने का प्रयास किया है, जिनमें अभियुक्त राजनीतिक रूप से प्रभावी, या पीड़ित अनुसूचित जाति/ दलित, हाशिए के समुदाय के रहे हैं, और आरोपी सामाजिक और राजनीतिक रूप से प्रभावी रहे हैं,... वह इस याचिका का प्राथमिक कारण है।"

याचिका में उन्नाव रेप मामले का जिक्र किया गया है, जिसमें इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अप्रैल 2018 में पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के बाद घटना का संज्ञान लिया था। उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से संबंधित सभी मामलों का स्वत: संज्ञान लिया था और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए सभी मामलों को उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया था।

पत्र में हाथरस गैंग रेप और मर्डर केस का भी जिक्र किया गया है, जिस मामले का इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लिया था।

प्रतिनिधित्व/ पत्र में कहा गया है, "सामूहिक बलात्कार की पुष्टि करने के पीड़िता के बयान के बावजूद, उसकी मौत से ठीक पहले, उत्तर प्रदेश पुलिस लगातार इस बात से इनकार करती रही कि बलात्कार हुआ था और बलात्कार के कोई सबूत नहीं मिले हैं। जब मामला आखिरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद, सीबीआई को सौंप ‌दिया गया, सीबीआई ने अब हाथरस गैंगरेप मामले में चार्जशीट दायर की है, जिसमें आरोपियों, जिन पर पीड़िता ने सामूहिक बलात्कार और हत्या का आरोप लगाए थे, उन्हें चार्ज किया गया है।"

इस प्रकार, पत्र का निष्कर्ष है ,"यह भरोसा पैदा नहीं होता है कि उत्तर प्रदेश पुलिस वर्तमान मामले में न्याय करेगी।"

याचिका की प्रार्थना

-प्रतिनिधित्व / पत्र में इलाहाबाद उच्च न्यायालय से आग्रह है: -

-मामले में संज्ञान लेना और अपनी निगरानी में मामले की जाच करवाना और इसे केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपना।

-उत्तर प्रदेश सरकार को एक मात्र जीवित बची नाबालिग को एयर-एम्बुलेंस से एम्स स्थानांतरित करने का निर्देश देना।

-मृतक लड़कियों के शव निकालने का आदेश देना और ऐम्स के फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम द्वारा प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश देना।

उल्लेखनीय है कि उन्नाव पुलिस ने तीन दलित लड़कियों को "जहर दिए जाने के" के बारे में "भ्रामक जानकारी फैलाने" के लिए याचिकाकर्ता [नीलीम दत्ता (अध्यक्ष, एकीकृत जन आंदोलन)] समेत आठ ट्विटर अकाउंट होल्डर्स को बुक किया है।

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