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तिहाड़ जेल में जेल अधिकारियों द्वारा विचाराधीन कैदी की कथित तौर पर हत्याः दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई को जांच ट्रांसफर की

LiveLaw News Network
21 July 2021 2:00 PM GMT
तिहाड़ जेल में जेल अधिकारियों द्वारा विचाराधीन कैदी की कथित तौर पर हत्याः दिल्ली हाईकोर्ट ने  सीबीआई को जांच ट्रांसफर की
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दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को तिहाड़ जेल के अंदर जेल अधिकारियों द्वारा एक विचाराधीन कैदी की कथित तौर पर हत्या करने के मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। कोर्ट ने कहा कि मामले में गहन जांच की आवश्यकता है।

न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि मृतक की बहन द्वारा किए गए उस दावे की कोई जांच नहीं की गई थी कि उसने अपनी मृत्यु से एक दिन पहले अपनी बहन को फोन करके उसे मार दिए जाने की आशंका व्यक्त की थी।

कोर्ट ने आदेश दिया कि,

''इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि अधीक्षक जेल द्वारा दायर स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, मृतक के शरीर पर कोई स्पष्ट चोट नहीं थी, हालांकि, याचिकाकर्ता का आरोप यह है कि मृतक के शरीर पर गहरे चोट के निशान थे, इस मामले में एक गहन जांच की आवश्यकता है। जांच के बाद ही यह पता चलेगा कि किन परिस्थितियों में मृतक ने अपनी बहन को फोन करके अपनी मौत की आंशका व्यक्त की थी और उसके बाद न्यायिक हिरासत में उसकी मौत हो गई। यह अदालत इस मामले में दर्ज प्राथमिकी की जांच सीबीआई को सौंपना उचित समझती है।''

मृतक की मां ने सीबीआई जांच और मौत के प्रासंगिक समय के सीसीटीवी फुटेज के संरक्षण की मांग करते हुए याचिका दायर की थी।

मृतक 13 जून 2019 से न्यायिक हिरासत के तहत तिहाड़ जेल में बंद में था। सफदरजंग अस्पताल ले जाने के बाद 14 मई 2021 को उसे मृत घोषित कर दिया गया था। इसलिए भारतीय दंड सहिंता की धारा 302 और 34 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

जेल अधीक्षक की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट में यह कहा गया था कि चार विचाराधीन कैदी मृतक को क्रिकेट के बल्ले से पीट रहे थे, जिसके परिणामस्वरूप एक कैदी और मृतक घायल हो गए थे। इसके बाद मृतक को जेल डिस्पेंसरी ले जाया गया और इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया।

याचिकाकर्ता का यह मामला था कि मृतक के शरीर के फोटो और वीडियो को देखकर यह पता चलता है कि उसकी जांघों और हाथों पर बने गहरे घाव बल्ले की चोट के कारण नहीं हो सकते हैं। इस तरह के घाव केवल किसी नुकीली वस्तु के वार से ही बन सकते हैं।

सीसीटीवी फुटेज के पहलू पर, जेल के महानिदेशक की ओर से यह प्रस्तुत किया गया था कि तिहाड़ जेल के अंदर स्थापित पुराने सीसीटीवी काम नहीं कर रहे हैं और इस प्रकार, वर्तमान में सीसीटीवी लगाने की एक मेगा योजना चल रही है और अधिकांश स्थानों पर नए सीसीटीवी लगा भी दिए गए हैं।

यह भी प्रस्तुत किया गया था कि स्थापित किए जाने वाले 6967 सीसीटीवी में से आधे से अधिक सीसीटीवी काम कर रहे हैं और शेष को 15 अगस्त 2021 तक क्रियाशील बना दिया जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि,''इस प्रकार यह स्पष्ट है कि घटना का कोई सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है। हालांकि, जिस तरह से कैदी की मौत हुई है,उसके अलावा मुख्य मुद्दा जो अब इस न्यायालय से संबंधित है, वह यह है कि जेल से एक फोन नंबर से एक पीसीआर कॉल की गई थी और उक्त फोन नंबर को पीसीआर कॉल में विधिवत रिकॉर्ड किया गया था,इस तथ्य के बावजूद कोई उचित जांच क्यों नहीं की गई?''

अदालत ने जांच को सीबीआई को ट्रांसफर करने का निर्देश देते हुए कहा है कि सुनवाई की अगली तारीख से पहले एक स्थिति रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष दायर की जाए।

अब इस मामले की सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

केस का शीर्षकः मलिका बनाम स्टेट ऑफ एनसीटी ऑफ दिल्ली व अन्य

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