व्हाट्सऐप चैट्स में पति के खिलाफ आरोपों के संकेत: ट्विशा शर्मा दहेज मृत्यु मामले में पति की अग्रिम जमानत खारिज

Praveen Mishra

19 May 2026 3:29 PM IST

  • व्हाट्सऐप चैट्स में पति के खिलाफ आरोपों के संकेत: ट्विशा शर्मा दहेज मृत्यु मामले में पति की अग्रिम जमानत खारिज

    भोपाल की एक सत्र अदालत ने अभिनेत्री और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत एवं दहेज उत्पीड़न मामले में उनके पति अधिवक्ता समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है।

    एडिशनल सेशन जज पल्लवी द्विवेदी ने कहा कि FIR, गवाहों के बयान और व्हाट्सऐप चैट्स के अवलोकन से प्रथम दृष्टया मुख्य आरोप समर्थ सिंह के खिलाफ प्रतीत होते हैं।

    अदालत ने यह भी माना कि ट्विशा शर्मा की शादी 9 दिसंबर 2025 को हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी और शादी के छह महीने के भीतर उनकी असामान्य परिस्थितियों में मृत्यु हुई।

    समर्थ सिंह के खिलाफ IPC की धारा 80(2) (दहेज मृत्यु), 85 (क्रूरता), 3(5) (सामान्य आशय) तथा दहेज निषेध अधिनियम की धाराओं 3 और 4 के तहत मामला दर्ज है।

    अभियोजन पक्ष का आरोप है कि समर्थ सिंह और उनके परिवार ने ₹2 लाख दहेज की मांग की थी तथा ट्विशा पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया। शिकायतकर्ता की ओर से यह भी कहा गया कि ससुराल पक्ष ने गर्भ में पल रहे बच्चे की पितृत्व पर सवाल उठाए थे, जिसके कारण ट्विशा मानसिक रूप से प्रताड़ित थीं।

    वहीं, बचाव पक्ष ने अदालत में दावा किया कि ट्विशा को मारिजुआना (Marijuana) सेवन की लत थी और उनके व्यवहार में असामान्य परिवर्तन दिखाई देते थे। समर्थ सिंह ने यह भी कहा कि चिकित्सकीय सलाह के बाद ट्विशा की सहमति से गर्भपात कराया गया था।

    घटना वाले दिन ट्विशा कथित तौर पर अपने माता-पिता से फोन पर बात कर रही थीं और बाद में घर की छत पर फंदे से लटकी मिलीं।

    अदालत ने कहा कि मामले की जांच अभी अधूरी है और आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए इस चरण पर अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा।

    हालांकि, इससे पहले अदालत ने समर्थ सिंह की मां, जो भोपाल जिला उपभोक्ता आयोग की अध्यक्ष और सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश हैं, को अग्रिम जमानत प्रदान की थी।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

    Next Story