दिल्ली दंगों के दौरान IB कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या करने वाली 'हिंदुओं के प्रति नफ़रत रखने वाली' गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा थे ताहिर हुसैन: कोर्ट
Shahadat
15 July 2026 9:21 AM IST

2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में पूर्व AAP पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी ठहराते हुए दिल्ली कोर्ट ने सोमवार को कहा कि ताहिर हुसैन उस गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा थे, जो "हिंदुओं के प्रति नफ़रत" के साथ इकट्ठा हुई थी और जिसका मकसद दंगा करना, आगजनी, लूटपाट और हिंदू समुदाय के लोगों को नुकसान पहुंचाना था।
कड़कड़डूमा कोर्ट के एडिशनल सेशन जज परवीन सिंह ने कहा कि गैर-कानूनी भीड़ ने शर्मा की हत्या करने से पहले उन्हें घेर लिया, अगवा कर लिया और बेरहमी से पीटा। उन्होंने यह भी कहा कि IPC की धारा 149 के तहत अपराधों के लिए भीड़ का हर सदस्य जिम्मेदार है।
अदालत ने कहा,
"....अभियोजन पक्ष ने बिना किसी शक के यह साबित किया कि घटना के समय, यानी 25.02.2020 को शाम करीब 5:00 बजे आरोपी ताहिर हुसैन एक बड़ी भीड़ और गैर-कानूनी जमावड़े का हिस्सा थे। यह भीड़ हिंदुओं के प्रति नफ़रत के साथ चांद बाग पुलिया पर इकट्ठा हुई और इसका मकसद दंगा करना, लूटपाट, आगजनी करना और हिंदू समुदाय के लोगों की संपत्ति और जान-माल को नुकसान पहुंचाना था; और इस भीड़ के सदस्यों को पता था कि भीड़ के मकसद को पूरा करने के दौरान किसी की मौत हो सकती है या किसी की हत्या हो सकती है।"
अदालत ने कहा कि गवाहों के बयानों से यह भी साबित हो गया है कि गैर-कानूनी भीड़ के सदस्य भारी हथियारों से लैस थे और उन्होंने हिंसा की तथा दंगा, आगजनी और लूटपाट की घटनाओं को अंजाम दिया।
अदालत ने कहा,
"यह भी साबित हो गया कि भीड़ के सदस्यों ने अंकित शर्मा को घेर लिया और उन्हें खींचते हुए चांद बाग पुलिया की ओर ले गए, जिससे उनका अपहरण हो गया। इसके बाद उन पर बेरहमी से और लगातार हमला करके उनकी हत्या कर दी गई।"
जज ने माना कि हुसैन, इंडियन पीनल कोड (IPC) 1860 की धारा 188, 153A (धारा 149 के साथ), 147 (धारा 149 के साथ), 148 (धारा 149 के साथ), 365 (धारा 149 के साथ) और 302 (धारा 149 के साथ) के तहत अपराधों का दोषी है।
हालांकि, उसे कोड की धारा 120B, 505, 109 और 114 के तहत लगे आरोपों से बरी कर दिया गया।
कोर्ट ने इसी तरह सह-आरोपी नाज़िम, कासिम, जावेद और अनस को भी उन्हीं अपराधों के लिए दोषी ठहराया। हालांकि, आरोपी हसीन, फ़िरोज़, गुलफ़ाम, शोएब आलम (हुसैन का भाई), समीर खान और मुंतज़िम को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
यह मामला दयालपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR 65/2020 से जुड़ा है।
यह FIR मृतक के पिता की शिकायत के आधार पर दर्ज की गई थी। दंगों के दौरान जब उनका बेटा लापता हो गया तो उन्होंने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। बाद में अंकित का शव एक नाले से बरामद हुआ। GTB अस्पताल ने उसे 'ब्रॉट डेड' (अस्पताल लाने से पहले ही मृत) घोषित किया।
ट्रायल के दौरान, अभियोजन पक्ष ने 91 गवाहों से पूछताछ की। उसने चश्मदीदों के बयान, फोरेंसिक सबूत, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों के आधार पर यह साबित किया कि शर्मा का अपहरण दंगाई भीड़ ने किया था, उनकी हत्या कर दी और शव को नाले में फेंक दिया।
अब यह मामला सज़ा की अवधि तय करने के लिए सुनवाई हेतु सूचीबद्ध किया जाएगा।
शिकायतकर्ता के बेटे अंकित शर्मा, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो में अधिकारी थे, उस तारीख को शाम करीब 5 बजे किराने का सामान और घर की अन्य ज़रूरी चीज़ें खरीदने के लिए घर से निकले थे। हालांकि, कई घंटे बीतने के बाद भी वे घर नहीं लौटे।
बाद में उनका शव चांद बाग पुलिया के पास एक नाले में पड़ा मिला। उनके सिर, चेहरे, छाती, पीठ और कमर पर धारदार हथियारों से चोटें आई थीं।
इसके बाद शिकायतकर्ता ने FIR दर्ज कराई जिसमें कहा गया कि उन्हें पक्का शक है कि उनके बेटे की हत्या मुख्य आरोपी ताहिर हुसैन और उसके साथियों ने की थी। मृतक अंकित शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि उन्हें धारदार हथियारों और कुंद चीज़ों के प्रहार से 51 चोटें आई थीं।


