जंतर-मंतर प्रदर्शन में मारपीट का मामला: दिल्ली कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

Praveen Mishra

7 Sept 2026 3:52 PM IST

  • जंतर-मंतर प्रदर्शन में मारपीट का मामला: दिल्ली कोर्ट ने स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

    दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को कथित मारपीट के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) में भेज दिया। यह मामला जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान Cockroach Janta Party (CJP) के एक नाबालिग कार्यकर्ता के पिता के साथ कथित मारपीट से जुड़ा है।

    पटियाला हाउस कोर्ट के एडिशनल सेशन जज सौरभ प्रताप सिंह ललर ने यह आदेश तब पारित किया, जब भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत पूरी होने के बाद अदालत के समक्ष पेश किया गया।

    इससे पहले शनिवार को अदालत ने उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा था।

    अब भारद्वाज को 21 सितंबर को फिर अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।

    बुलंदशहर से हिरासत में लिया गया था

    दिल्ली पुलिस ने भारद्वाज को शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया था। यह कार्रवाई संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर CJP द्वारा उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन किए जाने के कुछ घंटों बाद हुई।

    मामले में दिल्ली पुलिस ने FIR में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act और आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) से संबंधित प्रावधान भी जोड़े हैं।

    इसके अलावा, भारद्वाज के खिलाफ POCSO Act के तहत भी एक मामला दर्ज किया गया है।

    वीडियो पॉडकास्ट के बाद विवाद

    भारद्वाज उस समय जांच के दायरे में आए जब एक वीडियो पॉडकास्ट में कथित तौर पर नाबालिग प्रदर्शनकारी के पिता के साथ मारपीट करने से जुड़े उनके दावे सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।

    रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो में उन्होंने अपने राजनीतिक संपर्कों का भी जिक्र किया था।

    पुलिस मामले की जांच कर रही है और अदालत ने फिलहाल उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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