भारत और रूस के सुप्रीम कोर्ट के बीच हुए न्यायिक सहयोग पर MoU पर हस्ताक्षर

Shahadat

24 Jun 2026 11:00 AM IST

  • भारत और रूस के सुप्रीम कोर्ट के बीच हुए न्यायिक सहयोग पर MoU पर हस्ताक्षर

    न्यायिक सहयोग के क्षेत्र में भारत के सुप्रीम कोर्ट और रूसी संघ के सुप्रीम कोर्ट के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।

    चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत और रूसी संघ के सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस इगोर क्रासनोव ने मॉस्को में इस MoU पर हस्ताक्षर किए।

    रूसी संघ के सुप्रीम कोर्ट में बोलते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि अलग-अलग कानूनी परंपराओं से विकसित होने के बावजूद, भारत और रूस की शीर्ष अदालतों के सामने एक जैसी चुनौती है: तेजी से हो रहे तकनीकी और सामाजिक बदलावों के साथ तालमेल बिठाते हुए न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा बनाए रखना।

    इस बात पर जोर देते हुए कि तकनीक को न्यायिक निर्णय लेने की प्रक्रिया का विकल्प नहीं, बल्कि न्याय तक पहुंचने का एक साधन होना चाहिए, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायपालिका में भारत के डिजिटल बदलाव का मकसद अदालतों को अधिक सुलभ, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना रहा है।

    न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल का जिक्र करते हुए चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक दस्तावेजों के अनुवाद को आसान बनाने के लिए SUVAS (सुप्रीम कोर्ट विधिक अनुवाद सॉफ्टवेयर) जैसे टूल विकसित किए, जिससे अंग्रेजी में लिखे फैसलों का 16 क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है। उन्होंने हाल ही में लॉन्च किए गए AI-आधारित चैटबॉट "सु सहाय" (Su Sahay) का भी जिक्र किया, जो वादियों, वकीलों और आम जनता को अदालती प्रक्रियाओं, केस की स्थिति और फाइलिंग की जरूरतों से जुड़ी जानकारी देता है।

    चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने "वन केस, वन डेटा" (एक केस, एक डेटा) पहल का भी जिक्र किया, जिसका मकसद सभी न्यायिक प्लेटफॉर्म पर हर केस के लिए स्टैंडर्ड डिजिटल रिकॉर्ड बनाना है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन मध्यस्थता और सुलह को बढ़ावा देने के लिए भी तकनीक का तेजी से इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे कार्यक्षमता में सुधार, लागत में कमी और समय पर विवादों के समाधान में मदद मिल रही है।

    साथ ही, चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने इस बात पर जोर दिया कि न्याय व्यवस्था मूल रूप से इंसानी कोशिश ही बनी रहनी चाहिए। हालांकि AI अनुवाद, ट्रांसक्रिप्शन, सूचना प्रबंधन और प्रशासनिक सहायता के जरिए जजों की मदद कर सकता है, लेकिन यह नतीजों का फैसला नहीं कर सकता, गवाहों की विश्वसनीयता नहीं परख सकता, सबूतों का मूल्यांकन नहीं कर सकता या न्यायिक विवेक का इस्तेमाल नहीं कर सकता। उन्होंने न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में जारी ड्राफ्ट नियमों का जिक्र किया, जिनका मकसद न्यायिक स्वतंत्रता और इंसानी निगरानी को बनाए रखते हुए AI का जिम्मेदार तरीके से इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।

    अपने संबोधन के आखिर में चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अलग-अलग अधिकार क्षेत्रों में अदालतें तकनीकी नवाचार, जनता के भरोसे और संस्थागत तैयारी से जुड़ी एक जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। उन्होंने न्यायिक अकादमियों के बीच आदान-प्रदान, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों, शोध में सहयोग और बेहतरीन तौर-तरीकों को साझा करने के ज़रिए भारत और रूस की न्यायपालिकाओं के बीच और गहरे सहयोग की उम्मीद जताई।

    उन्होंने कहा,

    "न्याय का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि हम तकनीकी इनोवेशन को स्थायी मानवीय मूल्यों के साथ कितनी अच्छी तरह जोड़ पाते हैं।"

    साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देशों के सुप्रीम कोर्ट के बीच लगातार बातचीत से दोनों देशों में न्यायिक संस्थान मज़बूत होंगे।

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