सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु वक्फ बोर्ड पर हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

Praveen Mishra

19 Feb 2026 3:05 PM IST

  • सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु वक्फ बोर्ड पर हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 फरवरी) को मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें तमिलनाडु राज्य वक्फ बोर्ड के कामकाज पर रोक लगा दी गई थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि बोर्ड का गठन कानून के अनुसार नहीं हुआ है, क्योंकि इसमें दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करना, बार काउंसिल के एक सदस्य को नामित करना और एक पेशेवर अनुभव वाले व्यक्ति को नियुक्त करना अनिवार्य था, जिसका पालन नहीं किया गया।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने तमिलनाडु वक्फ बोर्ड द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। कोर्ट ने राज्य सरकार से बोर्ड के पुनर्गठन का प्रस्ताव प्रस्तुत करने को भी कहा। पीठ ने कहा, “नोटिस जारी किया जाता है। जिस आदेश से बोर्ड को निष्क्रिय किया गया है, उस पर रोक लगाई जाती है। राज्य सरकार बोर्ड के गठन का प्रस्ताव पेश करे।”

    बोर्ड की ओर से सीनियर एडवोकेट पी. विल्सन ने दलील दी कि 11 में से 8 सदस्यों की नियुक्ति हो चुकी है और केवल 3 पद शेष हैं, इसलिए इस आधार पर बोर्ड के कामकाज को रोकना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि बार काउंसिल के चुनाव चल रहे हैं, इसलिए उसका प्रतिनिधि अभी नियुक्त नहीं किया जा सका है।

    पृष्ठभूमि

    यह मामला मद्रास हाईकोर्ट के उस अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर SLP से संबंधित है, जिसमें कहा गया था कि तमिलनाडु वक्फ बोर्ड का गठन प्रथम दृष्टया कानून के अनुरूप नहीं है, इसलिए उसे अपने अधिकारों का प्रयोग करने से रोका जाता है।

    हाईकोर्ट में दायर याचिका में वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 14 के तहत बोर्ड के गठन को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का कहना था कि बोर्ड का गठन वैधानिक प्रावधानों के अनुसार नहीं हुआ। धारा 14(1) के खंड (d) के तहत दो पेशेवर अनुभव वाले व्यक्तियों की नियुक्ति आवश्यक है, जबकि केवल एक ही व्यक्ति नामित किया गया। इसी प्रकार खंड (f) के तहत राज्य बार काउंसिल के एक सदस्य को शामिल करना आवश्यक था, जो नहीं किया गया।

    याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि धारा 14(1) के दूसरे प्रावधान के अनुसार, पदेन सदस्यों को छोड़कर कुल सदस्यों में कम से कम दो गैर-मुस्लिम सदस्य होना अनिवार्य है, जिसका पालन नहीं हुआ।

    राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि बोर्ड का गठन लगभग पूरा हो चुका है और शेष पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि पुराने कानून के तहत नियुक्त दो सदस्य संशोधित प्रावधानों के अनुसार अपने पद पर बने हुए हैं और उन्हें गैर-मुस्लिम सदस्यों की गणना में शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

    हाईकोर्ट ने धारा 14 का अवलोकन करते हुए पाया कि बोर्ड का वर्तमान गठन कानून के अनुरूप नहीं है। कोर्ट ने कहा कि खंड (d) के तहत केवल एक नामांकन हुआ है, खंड (f) के तहत कोई नामांकन नहीं हुआ है और दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की अनिवार्यता भी पूरी नहीं हुई। इसलिए हाईकोर्ट ने बोर्ड को अपने अधिकारों और कार्यों के प्रयोग से रोक दिया और राज्य को जवाब दाखिल करने का समय दिया।

    तमिलनाडु वक्फ बोर्ड ने इसी अंतरिम आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिस पर अब सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।

    Praveen Mishra

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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