मीडिया में आने के लिए निराधार PIL दाखिल करना ठीक नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने युवा वकीलों को दी नसीहत

Praveen Mishra

9 March 2026 3:48 PM IST

  • मीडिया में आने के लिए निराधार PIL दाखिल करना ठीक नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने युवा वकीलों को दी नसीहत

    सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने युवा वकीलों को केवल मीडिया में सुर्खियां बटोरने के लिए जनहित याचिकाएं (PIL) दाखिल करने से बचने की सलाह दी। अदालत ने यह टिप्पणी उस समय की जब वह कथित “सिविक लापरवाही” के कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

    चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ ने कहा कि वकालत के शुरुआती वर्षों में युवा वकीलों को सीनियर वकीलों के साथ काम करके कानून और ड्राफ्टिंग सीखने पर ध्यान देना चाहिए, न कि केवल प्रचार पाने के लिए याचिकाएं दायर करनी चाहिए।

    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि “सिविक लापरवाही” से आशय उन परिस्थितियों से है जब सार्वजनिक प्राधिकरण बुनियादी नागरिक ढांचे के रखरखाव में विफल रहते हैं। उन्होंने कहा कि रिकॉर्ड पर कई ऐसी घटनाओं का संकलन रखा गया है, जिनमें सड़क पर खुले गड्ढों जैसी खतरनाक स्थितियों के कारण दुर्घटनाएं हुईं। एक उदाहरण का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि एक मामले में एक ट्रक खुले गड्ढे में जा गिरा था।

    इस पर चीफ़ जस्टिस ने पूछा कि ऐसे किसी विशेष मामले में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज क्यों नहीं की गई, बजाय इसके कि सीधे PIL के माध्यम से अदालत का दरवाजा खटखटाया जाए।

    जवाब में वकील ने कहा कि यह मुद्दा “राष्ट्रीय स्तर का प्रश्न” बन चुका है और केवल किसी एक घटना तक सीमित नहीं है।

    इसके बाद चीफ़ जस्टिस ने वकील से पूछा कि वह कितने समय से प्रैक्टिस कर रही हैं। जब उन्होंने बताया कि वह चार साल से वकालत कर रही हैं, तो अदालत ने युवा वकीलों को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें पेशे में गंभीरता से आगे बढ़ने के लिए सीनियर के साथ काम करके कानून सीखना चाहिए, न कि केवल प्रचार पाने के लिए याचिकाएं दाखिल करनी चाहिए।

    चीफ़ जस्टिस ने कहा, “आपको पेशे पर ध्यान देना चाहिए। राष्ट्रीय मीडिया में आने की प्रवृत्ति को रोका जाना चाहिए, खासकर उन लोगों के लिए जो इस पेशे को गंभीरता से लेना चाहते हैं। ऑफिस में काम करके कानून सीखने के बजाय आप लोग केवल इसलिए निराधार याचिकाएं ड्राफ्ट कर रहे हैं ताकि सोशल मीडिया में आ सकें।”

    अंततः खंडपीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह याचिका अस्पष्ट, व्यापक और अनिश्चित आरोपों पर आधारित है, जिसमें ऐसे निर्देश मांगे गए हैं जिन्हें लागू करना व्यावहारिक नहीं है। अदालत ने कहा कि इस PIL पर विचार करने का कोई कारण नहीं है, और इसे खारिज कर दिया।

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