सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनेगा छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस बल प्रयोग के खिलाफ याचिकाएं
Praveen Mishra
24 July 2026 4:48 PM IST

देशभर में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा कथित अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों से जुड़ी दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा।
शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस हिंसा से संबंधित दो विधिवत याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं और मामले में तत्काल सुनवाई की आवश्यकता है।
उन्होंने कोर्ट को बताया कि पुलिस रोजाना छात्रों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग कर रही है और स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। उन्होंने कहा, "कोर्ट ही हमारे और पुलिस के बीच खड़ा है। कुछ नियंत्रण आवश्यक है।"
इस पर चीफ़ जस्टिस ने कहा कि याचिकाओं को सूचीबद्ध किया जाए और सुनवाई की जाएगी। वरिष्ठ अधिवक्ता द्वारा तत्काल सुनवाई का आग्रह दोहराने पर सीजेआई ने मामले को सोमवार के लिए सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
याचिकाओं में 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के 'संसद चलो' मार्च के दौरान पुलिस कार्रवाई को चुनौती दी गई है। इनमें पुलिस द्वारा कथित लाठीचार्ज, आंसू गैस के इस्तेमाल, बड़े पैमाने पर हिरासत, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती पर सवाल उठाए गए हैं।
एक याचिका में सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई को विनियमित करने के लिए राष्ट्रीय दिशानिर्देश बनाने, भीड़ नियंत्रण में सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती पर रोक लगाने, BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लगाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तय करने तथा 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र जांच की मांग की गई है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि शांतिपूर्ण विरोध को दबाने के लिए बार-बार धारा 163 BNSS और BNS की धारा 152 का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं। इसके अलावा, पुलिस सुधारों के कार्यान्वयन, स्वतंत्र पुलिस शिकायत प्राधिकरणों के गठन और कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग या विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की भी मांग की गई है।


