राम मंदिर दान मामले की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट कल करेगा सुनवाई
Praveen Mishra
24 Aug 2026 11:10 AM IST

सुप्रीम कोर्ट ने पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की उस याचिका पर कल सुनवाई के लिए सहमति जताई है, जिसमें उन्होंने गाजियाबाद में दर्ज कथित रोड-रेज मामले की FIR रद्द करने और गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की है। उपाध्याय अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े कथित दान घोटाले और अनियमितताओं की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों में शामिल रहे हैं।
चीफ़ जस्टिस जस्टिस सूर्यकांत ने पत्रकार के वकील द्वारा तत्काल सुनवाई की मांग किए जाने के बाद मामले को कल सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
वकील ने कोर्ट को बताया कि राम मंदिर दान में कथित चोरी की खबर सामने लाने वाले पत्रकार के खिलाफ कई FIR दर्ज की गई हैं और अब SC/ST Act की कड़ी धाराओं के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस ने पत्रकार के घर पर छापा मारा है।
गाजियाबाद के इंदिरापुरम थाने में 18 अगस्त को दर्ज FIR के अनुसार, शिप्रा मॉल के पास एक बाइक को कथित तौर पर बलेनो कार ने टक्कर मारी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि कार चालक ने उसके साथ गाली-गलौज और धमकी दी तथा FIR में उपाध्याय का नाम जोड़ा गया।
उपाध्याय ने इन आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि 18 अगस्त को बेटी को स्कूल से वापस लाते समय शिप्रा मॉल के पास बाइक सवार व्यक्ति ने उनकी कार के सामने हंगामा किया, लेकिन कोई टक्कर या शारीरिक झड़प नहीं हुई और बेटी के साथ होने के कारण वह वहां से चले गए।
उन्होंने FIR में बाइक के नंबर को लेकर भी विसंगति का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि FIR में स्प्लेंडर बाइक का उल्लेख है, जबकि दिया गया नंबर किसी अन्य बाइक का है।
पत्रकार ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने घटनास्थल के आसपास की दुकानों पर जाकर दुकानदारों पर CCTV फुटेज हटाने या उपलब्ध न कराने का दबाव बनाया। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से CCTV और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि बार-बार मांग के बावजूद उन्हें FIR की पूरी प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई और FIR को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार वेबसाइट पर भी अपलोड नहीं किया गया।
उपाध्याय के अनुसार, 20 अगस्त की रात करीब एक दर्जन पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे, जबकि वह उस समय घर पर नहीं थे। उनकी पत्नी और दो बेटियां घर पर थीं। उन्होंने आशंका जताई है कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके खिलाफ कार्रवाई उनकी स्वतंत्र खोजी पत्रकारिता से जुड़ी है। उपाध्याय ने FIR रद्द करने और अंतरिम रूप से गिरफ्तारी समेत किसी भी कठोर कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है।
वैकल्पिक रूप से उन्होंने मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस से अलग किसी एजेंसी, जिसमें CBI भी शामिल है, से कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि वह किसी भी वैध जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं।


