राज्य बार काउंसिल ने पंजाब और हरियाणा सरकार से अधिवक्ता संरक्षण विधेयक के मसौदे को लागू करने का अनुरोध किया, कोई कदम नहीं उठाए जाने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

  • राज्य बार काउंसिल ने पंजाब और हरियाणा सरकार से अधिवक्ता संरक्षण विधेयक के मसौदे को लागू करने का अनुरोध किया, कोई कदम नहीं उठाए जाने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी

    पंजाब और हरियाणा बार काउंसिल ने दोनों संबंधित राज्य सरकारों को दो ड्राफ्ट [पंजाब एडवोकेट्स (प्रोटेक्शन) बिल 2023 और हरियाणा एडवोकेट्स (प्रोटेक्शन) बिल 2023) भेजकर जल्द से जल्द इसे लागू करने का अनुरोध किया है।

    परिषद ने सरकार को इस संबंध में पर्याप्त कदम नहीं उठाने पर राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी भी दी है।

    स्टेट बार काउंसिल द्वारा आज जारी एक प्रेस नोट में कहा गया है कि हाल ही में अधिवक्ताओं के खिलाफ हमले और कानूनी पेशेवरों के खिलाफ झूठे आरोप लगाने के मामले कई गुना बढ़ गए हैं और इसलिए, इस तरह के अधिनियम के कार्यान्वयन के संबंध में एक आवश्यकता महसूस की जा रही है।

    प्रेस नोट में कहा गया है,

    "पंजाब और हरियाणा राज्यों के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ माननीय हाईकोर्ट की पार्किंग में दिनदहाड़े हत्या, हिंसक हमले, गंभीर चोटों, अपहरण, डराने-धमकाने आदि की घटनाओं और असंतुष्ट/विपक्षी पक्षों द्वारा झूठे आरोप लगाने से मुवक्किल-वकील के विशेषाधिकार के उल्लंघन का अपमान, ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जिनकी सूचना बार एसोसिएशनों, व्यक्तिगत वकीलों या उनके परिवारों द्वारा राज्य बार काउंसिल को दी गई है। अकेले वर्ष 2023 में, जैसा कि अब तक बताया गया है, उत्तर प्रदेश में एडवोकेट उमेश पाल की और हाल ही में दिल्ली में एडवोकेट वीरेंद्र नरवाल की दिनदहाड़े हत्याएं हुई हैं। प्रवृत्ति स्पष्ट है। वकीलों को उनके काम के कारण हमले का सामना करना पड़ रहा है, और न्याय वितरण प्रणाली की व्यवहार्यता को बनाए रखने के लिए उन्हें बेहतर कानूनी सुरक्षा की आवश्यकता है।"

    प्रेस नोट में आगे कहा गया है कि वकीलों की स्वतंत्रता और सुरक्षा का सम्मान करना, उनकी रक्षा करना, उन्हें पूरा करना और बढ़ावा देना राज्य का दायित्व है। परिषद ने उनके अधिनियमन के लिए सरकार को दो मसौदा विधेयक भेजे हैं।

    प्रेस नोट में यह भी कहा गया है कि कई ऐसे कानून अस्तित्व में हैं जो सेवारत पेशेवरों यानी मीडियाकर्मियों, डॉक्टरों आदि को हिंसा के कृत्यों से बचाते हैं और हाल ही में राजस्थान राज्य अधिवक्ता संरक्षण विधेयक पारित करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है।

    इस पृष्ठभूमि में बार काउंसिल ने राज्यों से आने वाले दिनों में अपनी मांगों पर कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। इसने सरकारों को आगे चेतावनी दी है कि यदि पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए तो पंजाब, हरियाणा और यूटी इस संबंध में राज्यव्यापी आंदोलन करेंगे।

    ड्राफ्ट बिल की मुख्य विशेषताएं

    -धारा 3 एक वकील के खिलाफ हिंसा के कृत्य को अंजाम देने या उकसाने के मामले में सजा का प्रस्ताव करती है [न्यूनतम 6 महीने की कैद से 5 साल तक, और एक लाख रुपये तक का जुर्माना]

    -धारा 4 में प्रावधान है कि धारा 3 के तहत दोषी व्यक्ति को पीड़ित अधिवक्ता को मुआवजा देना होगा।

    -धारा 5 का प्रस्ताव है कि धारा 3 के तहत दंडनीय अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होगा।

    -धारा 6 अपराधों के प्रशमन का प्रस्ताव करती है

    -धारा 7 में एक वकील को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का प्रस्ताव है, जिस पर हिंसा के शिकार होने का खतरा है।

    प्रेस नोट/ड्राफ्ट बिल पढ़ने/डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें

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