सोनिया गांधी केस: मतदाता सूची में नाम जोड़ने का अधिकार सिर्फ चुनाव आयोग का

Praveen Mishra

11 Sept 2025 6:37 PM IST

  • सोनिया गांधी केस: मतदाता सूची में नाम जोड़ने का अधिकार सिर्फ चुनाव आयोग का

    दिल्ली की अदालत ने गुरुवार को कहा कि वह कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ चुनावी मतदाता सूची में 1980 में उनका नाम शामिल कराने के लिए प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराने की याचिका पर विचार नहीं कर सकती, क्योंकि इससे भारत के चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप होगा।

    राउज़ एवेन्यू कोर्ट्स के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट वैभव चौरसिया ने विकास त्रिपाठी द्वारा दायर शिकायत खारिज कर दी। त्रिपाठी का आरोप था कि गांधी ने फर्जी दस्तावेजों का उपयोग करके अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराया।

    अदालत ने कहा, “यह स्पष्ट है कि प्रस्तुत शिकायत इस उद्देश्य से तैयार की गई है कि अदालत के अधिकार क्षेत्र का आभास कराया जा सके, जबकि आरोप कानूनी रूप से असंगत और अपर्याप्त हैं। यह कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है, जिसे अदालत सहन नहीं कर सकती।”

    अदालत ने यह भी कहा कि त्रिपाठी ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत धोखाधड़ी और जालसाजी के प्रावधानों का सहारा लेने की कोशिश की, ताकि अदालत में न्यायिक अधिकार दिख सके। लेकिन केवल अधूरी और प्रमाणहीन दावों पर आधारित शिकायत कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं हो सकती।

    साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि नागरिकता और मतदाता सूची में किसी का नाम शामिल करने या हटाने की योग्यता जैसी बातें केवल केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आती हैं। संविधान के अनुच्छेद 11 और नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत यह पूरी तरह से केंद्रीय सरकार का कार्य है।

    अदालत ने कहा, “जब संविधान और कानून किसी कार्यक्षेत्र को चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के लिए आरक्षित करते हैं, तो त्रिपाठी निजी शिकायत के माध्यम से उस क्षेत्र में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। कोई कार्य प्रत्यक्ष रूप से नहीं किया जा सकता, तो अप्रत्यक्ष रूप से भी नहीं किया जा सकता।”

    त्रिपाठी का दावा था कि गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता 1983 में मिली थी। उनका कहना था कि गांधी का नाम 1982 में हटाया गया और 1983 में फिर से जोड़ा गया, और इसके लिए उन्होंने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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