Script Copy Row: 'धुरंधर' फिल्म की OTT रिलीज़ पर रोक लगाने से मुंबई कोर्ट ने किया इनकार

Shahadat

5 Jun 2026 9:41 AM IST

  • Script Copy Row: धुरंधर फिल्म की OTT रिलीज़ पर रोक लगाने से मुंबई कोर्ट ने किया इनकार

    मुंबई सिविल कोर्ट ने 4 जून को फिल्ममेकर संतोष कुमार की मांग को ठुकराते हुए बॉलीवुड फिल्म 'धुरंधर 2' की OTT रिलीज़ पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कुमार ने फिल्म के डायरेक्टर आदित्य धर पर अपनी ओरिजिनल स्क्रिप्ट की "कॉपी" करने का आरोप लगाया था।

    जज यूनुस खरादी ने कुमार की वह अर्ज़ी खारिज की, जिसमें फिल्म की OTT रिलीज़ पर अंतरिम रोक (ad-interim relief) की मांग की गई थी।

    जज ने गौर किया कि कुमार ने कर्नाटक हाईकोर्ट में दायर ऐसी ही एक अर्ज़ी के बारे में जानकारी छिपाई थी। हाईकोर्ट ने उनकी अर्ज़ी खारिज करते हुए उन्हें कानून के मुताबिक सही फोरम (अधिकार-प्राप्त मंच) पर उचित उपाय करने की छूट दी थी।

    जज ने आदेश में कहा,

    "लेकिन वादी (plaintiff) ने यह बात नहीं बताई, जिससे पहली नज़र में यह पता चलता है कि वह साफ नीयत से पेश नहीं हुए।"

    इसके अलावा, कोर्ट ने धर की दलीलों पर भी गौर किया। धर ने बताया कि हालांकि कुमार ने OTT प्लेटफॉर्म के खिलाफ निर्देश मांगे थे, लेकिन उन्होंने किसी भी OTT प्लेटफॉर्म को इस केस में पक्षकार (party) नहीं बनाया, खासकर रिलायंस ग्रुप को, जो Jio OTT प्लेटफॉर्म को कंट्रोल करता है। कोर्ट ने यह भी देखा कि 'धुरंधर' का पहला भाग पहले ही OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हो चुका था और दूसरा भाग भी आज (4 जून) ही रिलीज़ हुआ है।

    कोर्ट ने कहा,

    "पहली नज़र में यह भी दिखता है कि प्रतिवादी (Defendant) ने किसी तीसरे पक्ष का अधिकार बना दिया। शिकायत और दस्तावेजों से वादी ने स्क्रिप्ट और डायलॉग्स की समानता दिखाने के लिए कोई तुलना पेश नहीं की। जब तक इसकी पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक रोक (Injunction) लगाने और कोर्ट कमिश्नर की नियुक्ति का आदेश नहीं दिया जा सकता।"

    कोर्ट ने अपने आदेश में साफ किया कि सुविधा का संतुलन (Balance of Convenience) कुमार के खिलाफ है, क्योंकि वह अपने केस के समर्थन में कोई ठोस सामग्री पेश नहीं कर पाए।

    कोर्ट ने कहा,

    "इसलिए अगर वादी के पक्ष में अंतरिम राहत दी जाती है तो प्रतिवादियों को अपूरणीय नुकसान होगा। अगर वादी केस जीत जाता है तो वह मुआवज़े का दावा कर सकता है, इसलिए उसे कोई अपूरणीय नुकसान नहीं होगा।"

    इन बातों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने अंतरिम राहत की अर्ज़ी खारिज की।

    Case Title: Santosh Kumar vs Aditya Dhar (Notice Of Motion 1841 of 2026)

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