BREAKING| एससी कॉलेजियम ने आर्टिकल 224A के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में 5 रिटायर्ड जजों की एड-हॉक जज के तौर पर नियुक्ति को मंज़ूरी दी

Shahadat

3 Feb 2026 9:20 PM IST

  • BREAKING| एससी कॉलेजियम ने आर्टिकल 224A के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में 5 रिटायर्ड जजों की एड-हॉक जज के तौर पर नियुक्ति को मंज़ूरी दी

    एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने संविधान के आर्टिकल 224A के तहत इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिटायर्ड जजों को एड-हॉक जज के तौर पर नियुक्त करने को मंज़ूरी दी, यह एक ऐसा प्रावधान है, जिसका इस्तेमाल बहुत कम होता है।

    यह मंज़ूरी दो साल की अवधि के लिए दी गई।

    ये वे रिटायर्ड जज हैं, जिनके नामों की एड-हॉक जज के तौर पर नियुक्ति के लिए सिफारिश की गई:

    1. जस्टिस मोहम्मद फैज़ आलम खान।

    2. जस्टिस मोहम्मद असलम।

    3. जस्टिस सैयद आफताब हुसैन रिज़वी।

    4. जस्टिस रेनू अग्रवाल।

    5. जस्टिस ज्योत्सना शर्मा।

    इलाहाबाद हाईकोर्ट में केसों, खासकर क्रिमिनल केसों का बहुत ज़्यादा बैकलॉग है। 2021 में लोक प्रहरी बनाम भारत संघ और अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 224A के तहत एड-हॉक जजों की नियुक्ति के लिए गाइडलाइंस तय की थीं। आर्टिकल 224A हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को राष्ट्रपति की पिछली सहमति से एक पूर्व हाईकोर्ट जज से केसों की सुनवाई के लिए हाईकोर्ट के "जज के तौर पर बैठने और काम करने" का अनुरोध करने का अधिकार देता है। भारत के न्यायिक इतिहास में इस प्रावधान का इस्तेमाल बहुत कम हुआ है।

    जनवरी, 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने इस शर्त में ढील दी कि एड-हॉक जजों की नियुक्ति के लिए खाली पद स्वीकृत संख्या के 20% से ज़्यादा होने चाहिए। पिछले साल दिसंबर में कोर्ट ने साफ किया कि एड-हॉक जज या तो सिंगल बेंच में बैठ सकते हैं या मौजूदा जजों के साथ डिवीज़न बेंच का हिस्सा बन सकते हैं।

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