हिरासत में मौत का मामला: मदुरै कोर्ट ने सभी नौ पुलिस अधिकारियों को सुनाई मौत की सज़ा

Shahadat

7 April 2026 9:48 AM IST

  • हिरासत में मौत का मामला: मदुरै कोर्ट ने सभी नौ पुलिस अधिकारियों को सुनाई मौत की सज़ा

    मदुरै की पहली एडिशनल ज़िला और सेशन कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को, 2020 में साथनकुलम में पिता-पुत्र जयराज और बेनिक्स की हत्या के दोषी पाए गए सभी नौ पुलिस अधिकारियों को मौत की सज़ा सुनाई।

    जज जी. मुथुकुमारन ने टिप्पणी की कि यह दुर्लभ मामला था, जहां पुलिस अधिकारी, जिनका फ़र्ज़ क़ानून-व्यवस्था बनाए रखना था, उन्होंने ख़ुद ही क़ानून के ख़िलाफ़ काम किया और पिता-पुत्र पर बेरहमी से हमला किया, जिनके ख़िलाफ़ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था। अदालत ने अधिकारियों को मृतकों के परिवार को कुल 1.40 करोड़ रुपये का मुआवज़ा देने का भी आदेश दिया।

    23 मार्च को अदालत ने सभी नौ पुलिस अधिकारियों को IPC की धारा 109 और 34 के साथ पढ़ी जाने वाली धाराओं 342, 195, 211, 218 और 302 के तहत अपराधों का दोषी पाया था। अदालत ने आरोपियों के पिछले संपत्ति विवरण और उनके वेतन प्रमाण पत्र के बारे में रिपोर्ट मांगी थी।

    अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों से भी सज़ा बढ़ाने या कम करने वाली परिस्थितियों के बारे में रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद 2 अप्रैल को रिपोर्ट जमा की गईं और अदालत ने सज़ा के मामले पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। जहां CBI ने मौत की सज़ा के रूप में अधिकतम सज़ा की मांग की, वहीं आरोपियों के पक्ष ने अनुरोध किया कि उन्हें न्यूनतम सज़ा दी जाए।

    यह फ़ैसला उस भयानक घटना के छह साल बाद आया, जिसमें जयराज और उनके बेटे बेनिक्स की साथनकुलम पुलिस द्वारा हिरासत में की गई हिंसा के कारण मौत हो गई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपनी दुकान रात 9 बजे के बाद तक खुली रखी थी और उस समय लागू COVID-19 नियमों का उल्लंघन किया था।

    19 जून, 2020 को पिता-पुत्र को साथनकुलम पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहां पुलिस ने उन पर बेरहमी से हमला किया और उन्हें IPC की धाराओं 188, 269, 294(b), 353 और 506(2) के तहत रिमांड पर भेज दिया। बेनिक्स की चोटों के कारण 22 जून को और जयराज की 23 जून को मौत हो गई। मौत के बाद 10 पुलिस अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किए गए, और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की गई।

    मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने भी इस मामले का खुद संज्ञान लिया। खुद संज्ञान वाले मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने यह भी टिप्पणी की थी कि अधिकारियों के खिलाफ हत्या के आरोपों का प्रथम दृष्टया मामला बनता है। कोर्ट ने यह भी पाया कि अधिकारी मामले से जुड़े सबूतों को नष्ट करने की कोशिश कर रहे थे और CB-CID के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस को तुरंत जांच का जिम्मा संभालने का निर्देश दिया।

    राज्य सरकार ने एक स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए पुलिस महानिदेशक के अनुरोध पर जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को सौंप दी थी। तत्कालीन इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन, हेड कांस्टेबल एस. मुरुगन और ए. सामीदुरई, और कांस्टेबल एम. मुथुराज, एस. चेल्लादुरई, एक्स. थॉमस फ्रांसिस, एस. वेलुमुथु, और स्पेशल सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई के खिलाफ IPC की धारा 302, 342, 201, 182, 193, 211, 218, 120(B), और 34 के तहत अपराधों के लिए आरोप तय किए गए। हालांकि, पॉलदुरई की सुनवाई के दौरान COVID-19 के कारण मौत हो गई।

    सोमवार को आदेश पढ़ते हुए जज ने कहा कि जयराज और बेनिक्स को लगी चोटें अस्वाभाविक थीं, जिसके कारण अंततः उनकी मौत हो गई। कोर्ट ने इस दलील को भी खारिज किया कि चोटें उन्होंने खुद पहुंचाई थीं। साथ ही कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला है कि चोटें बार-बार किए गए हमले का नतीजा थीं।

    कोर्ट ने यह भी कहा कि हालांकि जयराज को दिल की बीमारी की पुरानी समस्या थी, लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि उनकी मौत बीमारी के कारण हुई। असल में उनकी मौत पुलिस के हाथों बार-बार लगी चोटों के कारण हुई। इस प्रकार कोर्ट ने यह निष्कर्ष निकाला कि यह हत्या का मामला था, और सभी नौ पुलिस अधिकारियों को दोषी पाया।

    Case Title: CBI v. Sridhar and 9 others

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