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शिक्षकों और गैर शिक्षण स्टाफ़ को वेतन दिया जाना है : केरल हाईकोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान स्कूल फ़ीस वसूलने के ख़िलाफ़ दायर याचिका ख़ारिज की

LiveLaw News Network
1 July 2020 2:09 PM GMT
शिक्षकों और गैर शिक्षण स्टाफ़ को वेतन दिया जाना है : केरल हाईकोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान स्कूल फ़ीस वसूलने के ख़िलाफ़ दायर याचिका ख़ारिज की
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केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार को लॉकडाउन के दौरान स्कूल फ़ीस की वसूली के ख़िलाफ़ दायर याचिका को ख़ारिज कर दिया।

श्री बुद्धा सेंट्रल स्कूल के दो छात्रों श्रीलक्ष्मी एस और धन्विन एम पिल्लै ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सरकार को स्कूलों को यह निर्देश देने का अदालत से आग्रह किया था कि लॉकडाउन के कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जो ऑनलाइन क्लास चलाए जा रहे हैं, उसकी सुविधा उन छात्रों को भी मिले जो फ़ीस नहीं चुका पाए हैं।

याचिककर्ताओं ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान मार्च से मई 2020 तक स्कूल बंद थे और ऑनलाइन क्लास जून 2020 में ही शुरू हुई लेकिन इसके बावजूद छात्रों को इस अवधि के लिए फ़ीस चुकाने को कहा गया है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एस मणिकुमार और न्यायमूर्ति शाजी पी चैली की पीठ ने स्कूल की इस दलील से सहमति जतायी कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान शिक्षकों और गैर शिक्षण स्टाफ़ को वेतन दिया जाना है। यह भी कहा गया कि स्कूल के रखरखाव और अन्य कार्यों पर होने वाले ख़र्चों को भी ध्यान में रखना होगा।

पीठ ने कहा,

"याचिककर्ताओं का मुख्य रूप से कहना यह है कि लॉकडाउन की अवधि के लिए फ़ीस की वसूली नहीं होनी चाहिए। प्रतिवादी नम्बर 6 और 7 के वक़ील ने कहा कि लॉकडाउन हो या न हो, शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को वेतन को देना ही है। हालांकि इसका प्रतिवाद नहीं किया गया, लेकिन रखरखाव पर होने वाले खर्च पर ग़ौर करने की ज़रूरत है।

यह देखते हुए कि पिछले साल और इस साल फ़ीस में कोई बदलाव नहीं किया गया है और ऊपर जो कारण बताए गए हैं और कई अन्य कारणों से लॉकडाउन के दौरान फ़ीस नहीं वसूलने की याचिककर्ता की मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।"

अदालत ने यह भी कहा कि वह सरकार को इस बारे में कोई निर्देश नहीं दे सकती कि सीबीएसई के सभी स्कूलों में समान फ़ीस संरचना लागू की जाए।

यह कहा गया कि भारत में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और दिल्ली सरकारों ने दिशानिर्देश जारी किए हैं कि फ़ीस की वसूली हर महीने हो और किसी भी छात्र को फ़ीस नहीं देने की वजह से ऑनलाइन क्लासेस के कोर्स मटेरियल देने से मना नहीं किया जाए।

पीठ ने इसको अस्वीकार करते हुए कहा कि सीबीएसई के दिशानिर्देशों के अनुसार फ़ीस की समीक्षा संबंधित सरकार के क़ानून और दिशानिर्देशों के तहत आता है। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा है कि अन्य राज्यों में भी स्थिति अलग नहीं है…हर राज्य को अपना निर्णय खुद लेने का अधिकार है।

हालांकि अदालत ने रिट याचिका ख़ारिज कर दी, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि याचिका ख़ारिज होने के बावजूद क़ानून के तहत फ़ीस हर माह वसूलने के याचिककर्ता के आग्रह पर ग़ौर किया जा सकता है और स्कूल को इस आग्रह पर ग़ौर करने का निर्देश दिया जाता है। एकल पीठ ने मामले की महत्ता को देखते हुए इस मामले को एक खंडपीठ को सौंपा था।

मंगलवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा था कि पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि सभी स्कूल, चाहे वे लॉकडाउन अवधि के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं की पेशकश करें या नहीं, ट्यूशन शुल्क लेने के हकदार हैं।

पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मई 2020 में एक आदेश ज़ारीकर सभी निजी और ग़ैर सहायता प्राप्त स्कूलों को लॉकडाउन को एखते हुए फ़ीस की वसूली पर रोक लगा दी थी।

मामला: श्रीलक्ष्मी एस बनाम केरल राज्य

केस संख्या: WP(C).No.10867, 2020

कोरम: मुख्य न्यायाधीश एस मणिकुमार और शाजी पी चैली

वक़ील: मनु रामचन्द्रन

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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