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धारा 138 एनआई एक्टः दिल्ली हाईकोर्ट ने घोषित अपराधियों का पता न लग पाने के कारण लंबित या स्थगित मामलों की सूची मांगी

Avanish Pathak
3 Jun 2022 9:40 AM GMT
धारा 138 एनआई एक्टः दिल्ली हाईकोर्ट ने घोषित अपराधियों का पता न लग पाने के कारण लंबित या स्थगित मामलों की सूची मांगी
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दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय) से नेगोशिएबल इंस्ट्रयूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत लंबित या अनिश्चित काल के लिए स्थगित सभी मामलों की एक समेकित सूची मांगी है।

जस्टिस तलवंत सिंह ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय) से गर्मी की छुट्टियों के दरमियान उक्त कार्य को पूरा करने के लिए एक समिति गठित करने का अनुरोध किया। कोर्ट ने 28 जुलाई से कम से कम दो सप्ताह पहले अनुपालन रिपोर्ट के साथ घोषित अपराधियों की सूची समेकित रूप में न्यायालय को भेजने का आदेश ‌दिया।

कोर्ट ने पहले एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें सिस्टम को सुव्यवस्थित करने के तरीके सुझाए गए थे ताकि उन व्यक्तियों के नाम और विवरण, जिन्हें पुलिस मामलों में और शिकायत मामलों में घोषित अपराधी या घोषित व्यक्ति घोषित किया गया है, उसे सार्वजनिक डोमेन में प्रकाशित किया जाता ताकि ऐसे व्यक्तियों को संबंधित न्यायालयों के समक्ष मुकदमों का सामना करने के लिए लाने के लिए और कदम उठाए जा सकें।

न्यायालय का विचार था कि घोषित अपराधियों या घोषित व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक डोमेन में होने चाहिए ताकि कोई भी संबंधित नागरिक उक्त व्यक्तियों के ठिकाने के बारे में पुलिस की सहायता कर सके और इससे राज्य को भी मदद यह सुनिश्चित करने के लिए आगे कदम उठाने में मदद मिलेगी कि उन्हें न्यायालयों के समक्ष लाया जाए।

अदालत ने तब निर्देश दिया कि उक्त रिपोर्ट डीसीपी, कानून के साथ-साथ प्रधान जिला और सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय) द्वारा दायर की जाए। तद्नुसार, विद्वान प्राचार्य एवं जिला एवं सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय) के कार्यालय से एक रिपोर्ट प्राप्त हुई थी। हालांकि, कोर्ट का विचार था कि यह काफी अस्पष्ट था।

जिसके बाद न्यायालय ने निर्देश दिया कि उक्त कार्य छुट्टियों के दौरान किया जाए और फाइलों की जांच की जाए, न्यायालयवार उचित सूची तैयार की जाए और उसके बाद उक्त सूचियां सुनवाई की अगली तारीख से पहले हाईकोर्ट को भेजी जाएं।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि समेकित सूची दिल्ली पुलिस की ओर से आगे की कार्रवाई के लिए डीसीपी, लीगल को भी भेजी जाए।

इसमें कहा गया कि डीसीपी, लीगल प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं, ताकि इस संबंध में एक समन्वित प्रयास किया जा सके और उचित कदम सुझाए जा सकें। अदालत ने निर्देश दिया, "विद्वान प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश इस उद्देश्य के लिए डीसीपी, कानून सहित सभी संबंधित अधिकारियों की बैठक बुला सकते हैं।"

अब मामले की सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

केस टाइटल: नीतू सिंह बनाम एनसीटी ऑफ दिल्ली

आदेश पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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