निजता का अधिकार मृत्यु के बाद समाप्त हो जाता है, कानूनी वारिस मृतक की डिजिटल संपत्ति का प्रबंधन कर सकते हैं: गुजरात कोर्ट

Shahadat

19 May 2026 7:51 PM IST

  • निजता का अधिकार मृत्यु के बाद समाप्त हो जाता है, कानूनी वारिस मृतक की डिजिटल संपत्ति का प्रबंधन कर सकते हैं: गुजरात कोर्ट

    गांधीनगर की सिविल कोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी मृतक व्यक्ति का निजता का अधिकार उसकी मृत्यु के बाद समाप्त हो जाता है और उसके कानूनी वारिस मृतक की डिजिटल संपत्ति का प्रबंधन कर सकते हैं।

    ऐसा करते हुए कोर्ट ने कहा कि मृतक पक्ष का Apple के 'iCloud अकाउंट' पर जमा "डिजिटल डेटा" एक कीमती डिजिटल प्रोपर्टी है, जो मृतक की संपत्ति का हिस्सा बनती है और जिस पर 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम' के तहत प्रबंधन का अधिकार लागू होता है।

    याचिकाकर्ताओं मृतक की पत्नी और बेटी ने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि वह यह मान्यता दे कि मृतक के Apple iCloud अकाउंट में जमा डिजिटल डेटा एक कीमती डिजिटल प्रोपर्टी है, जो उसकी संपत्ति का हिस्सा बनती है और जिस पर 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम' के तहत प्रबंधन का अधिकार लागू होता है। उन्होंने आगे यह भी मांग की थी कि याचिकाकर्ताओं के पक्ष में 'प्रशासन पत्र' (Letters of Administration) जारी किए जाएं, जो उन्हें मृतक की संपत्ति, जिसमें उसकी डिजिटल संपत्ति और iCloud डेटा भी शामिल है, का प्रबंधन करने का अधिकार प्रदान करें।

    थर्ड एडिशनल सीनियर सिविल जज हिमांशु चौधरी ने अपने आदेश में कहा:

    "इस कोर्ट की सुविचारित राय है कि निजता का अधिकार—जो कि मूल रूप से एक व्यक्तिगत अधिकार है—व्यक्ति की मृत्यु के साथ ही समाप्त हो जाता है; जैसा कि सुप्रीम कोर्ट ने 'जस्टिस के.एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017)' मामले में स्पष्ट किया था।

    'actio personalis moritur cum persona' (व्यक्ति की मृत्यु के साथ ही उसके व्यक्तिगत अधिकार भी समाप्त हो जाते हैं) के सिद्धांत को लागू करते हुए मृतक के निजता के अधिकार के संबंध में ऐसा कोई भी दावा मान्य नहीं हो सकता, जो उसके कानूनी वारिसों को उसकी डिजिटल संपत्ति का प्रबंधन करने से रोके। इसके अलावा, यदि मृतक ने 'डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023' की धारा 14 के तहत किसी नामित व्यक्ति (Nominee) की नियुक्ति नहीं की है तो मृतक के डिजिटल डेटा के प्रबंधन और उस तक पहुंच से संबंधित अधिकार तार्किक रूप से उसके कानूनी वारिसों को हस्तांतरित हो जाते हैं; ये वारिस संपत्ति के प्रबंधन के सीमित उद्देश्य के लिए 'डेटा प्रधान' (Data Principal) का स्थान ग्रहण कर लेते हैं।"

    मृतक की मृत्यु 24 अप्रैल, 2025 को गांधीनगर में बिना किसी वसीयत या मृत्युकालीन दस्तावेज को निष्पादित किए, यानी 'बिना वसीयत' (Intestate) हुई थी। उसके पीछे उसके दो 'प्रथम श्रेणी के कानूनी वारिस' उसकी पत्नी और बेटी (जो इस मामले में याचिकाकर्ता भी हैं) जीवित हैं। वह एक Apple iPhone 13 Pro Max के कानूनी मालिक और एकमात्र यूजर्स थे। इस संबंध में याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि फ़ोन के iCloud खाते में याचिकाकर्ताओं के लिए भावनात्मक, संवेदनात्मक और व्यावहारिक महत्व का बहुमूल्य व्यक्तिगत डेटा मौजूद है, जिसमें तस्वीरें, वीडियो, दस्तावेज़, वॉइस नोट्स और संपर्क सूचियां शामिल हैं।

    याचिकाकर्ताओं ने मृतक की डिजिटल प्रोपर्टी तक पहुंच प्राप्त करने और उसे पुनः प्राप्त करने के उद्देश्य से Apple से संपर्क किया। Apple ने सूचित किया कि वह iCloud अकाउंट के डेटा तक पहुंच की अनुमति देने के लिए पासवर्ड/सुरक्षा रीसेट की सुविधा प्रदान कर सकता है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि उसके पास केवल भौतिक डिवाइस पर संग्रहीत डेटा को पुनः प्राप्त करने का कोई साधन उपलब्ध नहीं है।

    Apple ने आगे यह शर्त रखी कि अनुरोधकर्ता को मृतक की संपत्ति का विधिवत नियुक्त प्रशासक या कानूनी व्यक्तिगत प्रतिनिधि होना चाहिए। उसके पास एक ऐसा न्यायालय आदेश होना चाहिए, जिसमें विशिष्ट घोषणाएं शामिल हों।

    यह मानते हुए कि iCloud पर मौजूद डिजिटल डेटा संपत्ति का ही एक हिस्सा है, जिसका प्रशासन 'भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम' (Indian Succession Act) के तहत किया जा सकता है, न्यायालय ने याचिकाकर्ता संख्या 2—जो मृतक की पुत्री हैं—को उक्त संपत्ति का प्रशासक नियुक्त किया।

    न्यायालय ने Apple Distribution International Limited और/या उसकी सहयोगी संस्थाओं को यह निर्देश दिया कि वे प्रशासक को मृतक के डेटा को पुनः प्राप्त करने में सहायता प्रदान करें, तथा भौतिक डिवाइस पर स्थानीय रूप से संग्रहीत किसी भी डेटा को पुनः प्राप्त करने में—जहां तक तकनीकी रूप से संभव हो—सहायता उपलब्ध कराएं।

    Case title: Smt. Sadhna Shaishav Shah & Anr. v/s NIL

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