कलकत्ता हाईकोर्ट ने RG Kar के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के खिलाफ मुकदमे के लिए समय बढ़ाने की याचिका खारिज की

Praveen Mishra

5 Feb 2025 7:12 PM IST

  • कलकत्ता हाईकोर्ट ने RG Kar के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के खिलाफ मुकदमे के लिए समय बढ़ाने की याचिका खारिज की

    कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपना वह आदेश वापस लेने से इनकार कर दिया है जिसमें उन्होंने आरजी कर कॉलेज और अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष के उस अनुरोध को खारिज कर दिया , जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोपों में उनके खिलाफ मुकदमे के लिए समय बढ़ाने की मांग की थी।

    इससे पहले, जस्टिस तीर्थंकर घोष ने इस आधार पर अनुरोध खारिज कर दिया था कि घोष मुकदमे में देरी कर रहे हैं और उन्होंने विशेष सीबीआई अदालत को घोष के खिलाफ तेजी से आगे बढ़ने का निर्देश दिया था।

    आज की सुनवाई में अदालत ने कहा कि वह वापस लेने के आवेदन पर विचार नहीं कर सकती क्योंकि पहले के आदेश के बाद से मुकदमा काफी आगे बढ़ चुका है। यह कहा गया था कि घोष ने खुद का प्रभावी ढंग से बचाव करने में असमर्थ होने के लिए सीबीआई द्वारा पेश किए गए भारी-भरकम दस्तावेजों का हवाला दिया था, लेकिन अदालत मुकदमे में देरी के प्रति सचेत थी जो पहले ही हो चुकी थी।

    तदनुसार, अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता द्वारा जिन उदाहरणों पर भरोसा किया गया है, वे अदालत के लिए अनुच्छेद 226 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करने के लिए पर्याप्त नहीं होंगे। घोष के वकीलों ने कहा है कि वे फैसले के खिलाफ खंडपीठ में अपील करेंगे।

    मामले की पृष्ठभूमि:

    हाईकोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी से जांच को स्थानांतरित करने के बाद से संदीप घोष की जांच सीबीआई द्वारा की थी। ये कार्यवाही पूर्व चिकित्सा अधीक्षक अख्तर अली की शिकायत से शुरू हुई थी, जिन्होंने घोष पर भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन का आरोप लगाया था।

    विशेष रूप से, संदीप घोष से कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में एक प्रशिक्षु डॉक्टर के क्रूर बलात्कार और हत्या के आसपास के बड़े षड्यंत्र के मामले में भी पूछताछ की गई थी।

    पिछले महीने एकमात्र आरोपी संजय रॉय को बलात्कार और हत्या मामले में उसकी संलिप्तता के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।

    Praveen Mishra

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    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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