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"एक बार स्वीकार किया गया इस्तीफा वापस नहीं लिया जा सकता", इस्तीफे के बाद प्रोफेसर ने की जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दोबारा ज्वाइन करने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

LiveLaw News Network
26 Oct 2021 12:04 PM GMT
एक बार स्वीकार किया गया इस्तीफा वापस नहीं लिया जा सकता, इस्तीफे के बाद प्रोफेसर ने की जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दोबारा ज्वाइन करने की मांग, दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
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दिल्‍ली हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि एक बार स्वीकार किया गया इस्तीफा वापस नहीं लिया जा सकता है, सोमवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्स‌िटी के एक पूर्व प्रोफेसर द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया। याचिका में इस्तीफा देने के एक साल बाद फिर से ड्यूटी पर आने की मांग की गई थी।

जस्टिस वी कामेश्वर राव ने मोहर्रम अली खान की याचिका खारिज की, जिन्हें 2007 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया में गणित के प्रोफेसर के रूप में नियुक्त किया गया था।

खान ने सेंटर फॉर इंटरडिसिप्लिनरी रिसर्च इन बेसिक साइंसेज में प्रोफेसर के रूप में फिर से अपनी ड्यूटी ज्वाइन करने की अनुमति देने के लिए निर्देश की मांग की थी। वह सऊदी अरब के एक यूनिवर्स‌िटी में एक साल की सेवा के बाद भारत लौटे थे।

याचिकाकर्ता ने 17 फरवरी, 2010 को किंग अब्दुलअजीज यूनिवर्स‌िटी, सऊदी अरब में प्रोफेसर के पद के लिए आवेदन किया था। याचिका में उन्होंने कहा था कि वहां एक वर्ष की अनुबंध सेवा पूरी करने के बाद वे 25 अगस्त, 2011 को भारत वापस आए और यूनिवर्स‌िटी में ड्यूटी के लिए रिपोर्ट किया, हालांकि, ज्वाइन करने के उनके अनुरोध को अधिकारियों ने स्वीकार नहीं किया।

जिसके बाद मामले में याचिका दायर की गई, जिसमें यह घोषणा करने की मांग की गई कि यूनिवर्स‌िटी द्वारा उन्हें नौकरी के लाभ से वंचित करने की कार्रवाई को अवैध, मनमाना और भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (जी) के तहत निहित उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन माना जाए।

जामिया की ओर से पेश वकील ने हालांकि बताया कि याचिकाकर्ता के असाधारण अवकाश के अनुरोध को खारिज किए जाने के बावजूद वह इस कारण से सऊदी अरब चला गया कि उसने इस्तीफा दे दिया है। समझबूझ के साथ इस्तीफा देने के बाद वह उसे चुनौती नहीं दे सकते। हालांकि याचिकाकर्ता ने इसका विरोध किया और कहा कि इस्तीफा स्वीकार करने के किसी आदेश के बाद में उन्हें सूचित नहीं किया गया और न ही उन्होंने उत्तराधिकारी को प्रभार सौंपने की प्रक्रिया का पालन किया है।

कोर्ट ने नोट किया, "... ईओएल (असाधारण अवकाश) के लिए याचिकाकर्ता के अनुरोध को खारिज कर दिया गया था, वह सऊदी अरब में असाइनमेंट लेने के लिए यूनिवर्स‌िटी नहीं छोड़ सकता था। सऊदी अरब जाने से पहले उसे कम से कम अपने इस्तीफे के बारे में पूछताछ करनी चाहिए थी। एक बार स्वीकार कर लिया गया इस्तीफा वापस नहीं लिया जा सकता है।"

सुनवाई के दौरान, कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से उसके रोजगार की वर्तमान स्थिति के बारे में पूछा, जिस पर यह जवाब दिया गया था कि वह 2013 से नाइजीरिया में नौकरी कर रहे हैं।

कोर्ट ने या‌चिका खारिज करते हुए कहा, "मुझे लगता है कि याचिकाकर्ता ने इस्तीफा दे दिया है, जिसके अनुरोध को स्वीकार कर लिया गया है, उसे अपनी ड्यूटी फिर से ज्वाइन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। इस मामले के तथ्यों के समक्ष मुझे याचिका में कोई योग्यता नहीं दिखती है। इसे खारिज किया जाता है।"

केस शीर्षक: मोहर्रम अली खान बनाम जामिया मिलिया इस्लामिया और अन्य।

आदेश पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

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