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किसी व्यक्ति को संपत्ति के अधिकारों से वंचित करने के कानूनी प्रावधान का कड़ाई से पालन होना चाहिएः सुप्रीम कोर्ट

LiveLaw News Network
5 March 2020 9:40 AM GMT
किसी व्यक्ति को संपत्ति के अधिकारों से वंचित करने के कानूनी प्रावधान का कड़ाई से पालन होना चाहिएः सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति को संपत्ति के अधिकारों से वंचित करने के किसी भी कानूनी प्रावधान का कड़ाई से पालन किया जाना चाहिए। पीठ ने भूमि अधिग्रहण मामले में दायर अपील की अनुमति देते हुए पाया था कि राज्य यह स्थापित करने में विफल रहा है कि उन्होंने कानून के मुताबिक, भूमि अधिग्रहण किया था और उचित मुआवजा दिया था।

अपीलार्थी के मामले में सिक्किम भूमि (अनुरोध व अधिग्रहण) अधिनियम, 1977 (इसे आगे में अध‌िनयम कहा गया है) के तहत परिकल्पित की गई प्रक्रिया पर अमल या अनुकरण नहीं किया गया था और राज्य सरकार ने उसकी संपत्ति पर अतिक्रमण कर लिया था।

मामले में जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की पीठ ने कहा कि राज्य के पास ऐसी कोई स्‍थ‌िति नहीं थी कि उन्होंने प्रतिकूल कब्जा किया, उन्होंने उचित प्रक्रिया के जरिए जमीन का अधिग्रहण किया और मुआवजा दिया। यह साबित करने का बोझ कि राज्य पर है कि जमीन के अधिग्रहण में उक्त अधिनियम के तहत परिकल्पित प्रक्रिया का पालन किया गया और मुआवजे का भुगतान किया गया। बेंच ने कहा कि इनमें से किसी भी पहलू के समर्थन में एक भी प्रमाण नहीं दिया गया है।

बेंच ने अपील की अनुमति देते हुए कहा,

"भले ही भूमि का अधिकार मौलिक अधिकार नहीं है, फिर भी यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 300A के तहत एक संवैधानिक अधिकार है, और किसी भी व्यक्ति को संपत्ति के अधिकारों से वंचित करने के लिए बने अधिनियम के प्रावधानों का सख्ती से पालन होना चा‌‌हिए।

"यह भी कानून है कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम, 1894 (उक्त अधिनियम की धारा 5 (1) के समान) की धारा 4 (1) की प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है, और जब तक कि निहित प्रावधानों के अनुसार नोटिस नहीं दिया जाता है, पूरी अधिग्रहण की कार्यवाही को समाप्त कर दिया जाएगा। गैर-अनुपालन के अधार पर परिसर में किया गया प्रवेश, प्रवेश को गैर-कानूनी बना देगा।

नोटिस का उद्देश्य भूमि अधिग्रहण के उद्देश्य के बारे में इच्छुक व्यक्तियों को सूचित करना है। उक्त अधिनियम के प्रावधानों को, जैसे कि वे पढ़े जाते हैं, इसके बाद भी पालन की आवश्यकता होती है।"

केस टाइटल: डीबी बेसनेट (डी) बनाम दी कलेक्टर

केस नंबर: CIVIL APPEAL NO.196 Of 2011

कोरम: जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ

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